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Tulsidas Poetry in Hindi -Man Pachitaihai Avsar Beetey


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मन पछितैहै अवसर बीते।
दुर्लभ देह पाइ हरिपद भजु, करम, बचन अरु हीते॥१॥
सहसबाहु, दसबदन आदि नप बचे न काल बलीते।
हम हम करि धन-धाम सँवारे, अंत चले उठि रीते॥२॥
सुत-बनितादि जानि स्वारथरत न करु नेह सबहीते।
अंतहु तोहिं तजेंगे पामर! तू न तजै अबहीते॥३॥
अब नाथहिं अनुरागु जागु जड़, त्यागु दुरासा जीते।
बुझै न काम-अगिनि तुलसी कहुँ, बिषयभोग बहु घी ते॥४॥

Man pachtaihai avsar beetey

Durlabh deh payi haripad bhaju, karam, bachan aru heete. ||1||

Sahasbahu dasbadan aadi nap bache na kaal baleete.

Ham ham kari dhan-dham savare, ant chale uthi reete. ||2||

Sut-banitadi jaani swarathrat na karu neh sabheete.

Antahu tohi tajenge pamar! Tu na tajai abheete. ||3||

Ab Nathahi anurag jadu jad, tyagu durasa jeete.

Bujhai na kaam-agani Tulsi kahu, bishaybhog bahu ghee te. ||4||

भावार्थ:

गोस्वामी तुसलीदास जी प्रस्तुत पद में कह रहे हैं –

हे मन, अवसर बीता जा रहा है और बाद में जब यह मानव देह छिन जाएगी, तब तू बहुत पछतायेगा। मानव देह जो देव-दुर्लभ है, बहुत बड़ी भगवद-कृपा के बाद ही प्राप्त होता है। इस दुर्लभ देह को पा कर हे मन तुझे भगवन के चरणों का भजन, ध्यान करना चाहिए। कर्म, वचन और ह्रदय भी भगवान् के निमित्त ही लगाने चाहियें। ||1||
सहस्त्रबाहु और रावण आदि भी काल से नहीं बच सके। जो सारा जीवन अपने लिए धन बटोरते रहे और धाम सजाते रहे, वो मरते समय खाली हाथ गए। ||2||
पुत्र, पत्नी, आदि सब परिवार जनों का सम्बद्ध तुझसे स्वार्थ का है और इसीलिए उनसे प्रेम न कर। वो सब तुझे अंत समय छोड़ देंगे, तू उनको अभी से क्यों नहीं त्याग देता। ||3||
अब तू नींद से जाग और भगवन से अनुराग कर। कामनाओं की अग्नि ऐसे नहीं बुझेगी बल्कि विषयभोग से घी की तरह और बढ़ती जाएगी। यह केवल प्रभु भक्ति के जल से ही कम होगी। ||4||

English Translation:

Gowswami Tulsidas Ji says:

Oh mind, the golden chance to change your future – the human body is there with you. If you lose this body without attaining your spiritual goal i.e. meeting God, you will regret this forever. This human form is desired by the heavenly Gods (Devtas) and is attained only with God’s grace. After attaining human body, oh mind, you should worship the lotus feet of God.

Kings like Sahastrabahu and Ravana had to leave this human body at the time of their death. Those who spend their entire life in aggregating wealth for themselves and decorating their homes also leave this body empty handed.

Son, wife and other worldly relations are based on selfishness and therefore do not love them. All of them will leave you once you are dead, why don’t you leave them immediately (get detached from them).

Oh mind, now wake up and love God. The fire of your desires will not end by getting more worldly things as these are like fuel to the fire. You can control your desires by devotion that acts like water on the fire.

Hindi Poem on Bad Donation-Kapati Daan Ki Durgati


कपटी दान की दुर्गति

तुलसी दान जो देत है जल में हाथ उठाई |
प्रतिग्राही जीवै नहीं दाता नरकै जाई |

संत तुलसीदासजी कहते हैं – जो लोग जल में हाथ उठा के दान (चारा) मछलियों को फ़साने की मंशा से देते हैं, उस दान को ग्रहण करने वाली मछली तो जीती नहीं और वह दाता भी नरक में जाता है |

Tulsi daan jo det hai jal mein hath uthai.
Pratigrahi jevai nahin daata narkai jayi.

Saint Tulsidas Ji says- the people who raise their hands to donate food (offer bait) to the fish with the intention of trapping it, the fish feeding on such donation does not live and such a donor also goes to hell.

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