Hindi Poem on an Old Lady Rag-picker: Pagal Budhiya

पागल बुढिया 

बालों के झोपें से क्या वो परेशान नहीं होती,
सड़क के किनारें रोज चलते कचरा बीनते,
नजर पड़ती है मुझ जैसे हजारों की उस पर,
क्या किसी की नजरें उस पर तंग परेशान नहीं होती,
क्या बात है आखिर उन बूढी आंखों में,
एक ना सिकन है चेहरे पर,
ताज्जुब उसे कभी यूं भटकते थकान नहीं होती,
कैसे निष्ठुर पीढी बना रहे है साहेब,
उम्र गुजारी जिसने हमारा आज लिखने को,
फुटपाथ पर उसके नंगे पैरों में जान नहीं होती,
रोज उसी सडक के किनारें हतप्रभ हो जाती हूं,
आखिर उसके हौसले के सामने खामोश हो जाती हूं,
हम बदल गये हैं, हमारी रफ्तारें तेज हो गयी हैं,
बडी खुदमिजाज है, कहती हाथ फैलाये जिदंगी पार नहीं होती,
ये लो कोई कहता कमसिन बुढिया, कोई कचरे बाली बुढिया,
हम तथाकथित शिक्षित पीढी की अम्मा कहने की बात नहीं होती,
गुजर कर कल को ये हालात कमतर नहीं होगें,
आज वो कल कोई और, कोई समझे तो ये हालात ना होती,
बालों के झोपें से क्या वो परेशान नहीं होती,
काश! उसके सवालों का मैं कोई जवाब होती!!!

डाॅ. अवन्तिका शेखावत

Hindi Poems on Motivation-तू लड़ तो सही मेरे यार

तू लड़ तो सही मेरे यार
तू होगा सफल मेरे यार
खुद पर भरोसा रख
तू होगा सफल मेरे यार
ये जुनून जो बीतर है,
उसको बहार तो ला मेरे यार
सब कुछ फतेह करेगा तू
बस लड़ तो सही मेरे यार
किस बात का डर है यार
तू भाहर तो निकल यार
तू फौलादी सीना है
सब को दिखा दे यार
तू लड़ तो सही मेरे यार
अब पीछे नहीं जाना है
बस आगे बढ़ना है
मंजिल पाकर अब वापस आना है यार
बस तू लड़ तो सही मेरे यार

-अनुभव मिश्रा

Tu lad to sahi mere yaar
Tu hoga safal mere yaar
Khud pa bharosa rakh
Tu hoga safal mere yaar
Ye janoon jo bhitar hai
Usko bahar to laa mere yaar
Sab kuch fatah karega tu
Bas lad to sahi mere yaar
Kis baat ka dar hai yaar
Tu bahar to nikal yaar
Tu fauladi sina hai
Sab ko dikha de yaar
Tu lad to sahi mere yaar
Ab piche nahi jana hai
Bas aage badna hai
Manjil pa kar ab bapis aana hai yaar
Bas u lad to sahi mere yaar

-Anubhav Mishra