Category Archives: Abstract Poems

Hindi Poem on Wind-Malay Sameer Tu Mand Mand Chal


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मलय समीर तू मंद-मंद चल
मलय समीर तू मंद-मंद चल।
कुसुम सुवास फैलाती जल थल
निर्झर से कल-कल स्वर,
नदियाँ की धार का कर्णप्रिय रव
सुनाती चल
मलय समीर तू मंद-मंद चल।
गिरी से तुषार कण की शीतलता
ठहरे नीर से निर्मलता लेती चल
मलय समीर तू मंद-मंद चल।
विहंगों का गान ,
अम्बर तक ऊँची उड़ान
से प्रमाण देती चल।
मलय समीर तू मंद-मंद चल।
मरूभूमि की धूली में सनती
जलधि में गोते लगाती चल
मलय समीर तू मंद-मंद चल।
कानन-कानन,विटप-विटप,
पर्ण -पर्ण हिलाती चल
मलय समीर तू मंद-मंद चल।
जलचर,थलचर,नभचर,उभयचर
को अपनी थपकी से सहलाती चल
मलय समीर तू मंद-मंद चल।
घाटी की गहराई नापती
गिरी शिखर की ऊँचाई नापती
मलय समीर तू मंद-मंद चल।
कुसुम की कोमलता,पत्थर की कठोरता,
हृदय की मृदुलता,मन की चंचलता
का अहसास कराती चल
मलय समीर तू मंद-मंद चल।
मिले जो नवयुवती तो उसके
कुंतल लहराती चल
विजय पताकाओं को भी नित
फहराती चल
मलय समीर तू मंद-मंद चल।
कृषक पसीने से तर जो मिले
तू उसका तन सुखाती चल
मलय समीर तू मंद-मंद चल।
खेतों में लहराती फसल में
सर सर शोर मचाती चल
मलय समीर तू मंद-मंद चल।
बहक गया जो छुअन से तेरी
उसका मन बहलाती चल
मलय समीर तू मंद-मंद चल।
-कविता कोसलिया

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Hindi Poem on Motivation-Manzil


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मंज़िल
जो बढ़ा है ,अपना कदम आगे।
वो रुके ना किसी डर से पीछे।।
हमें हिम्मत से बढ़ना होगा।
नया आयाम फिर से घड़ना होगा।
ये मुश्किल कुछ पल की हट जायेगी।
हमे यकीं है, मंज़िल ज़रूर नज़र आएगी।।
-संजय

Hindi Poem on Honesty-Bhalai


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भलाई
है इस जगत में कोई सच्चाई ।
कोई कोई करे इसमें भलाई।।
सच्चे मार्ग पर चलने वाले,
दुःख पाते हैं पर वही जीत जाते हैं।
लाखों बाधा पार करे सच से ही
बस वार करे हर झूठ हराते है।।
-संजय

Hindi Poem on Dreams-Jeevan Ka Marg


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जीवन का मार्ग
मैं जिसमें चुन -चुन कर कदम रखती हूँ,
जीवन का वो हर मार्ग मैं खुद ही बनाती हूँ।
एक भूलभूलैया सा नज़र आता है खुद की आँखों में,
मै अपनी नज़रों में ही खो जाती हूँ।
जीवन किसी रेल सा गुजरता है,
मैं किसी पुल की भाँति कंपकंपाती हूँ।
मै जिसमें चुन-चुन कर कदम रखती हूँ,
जीवन का वो मार्ग मैं खुद ही बनाती हूँ।
मैं जब तेरे बारे में सोचती हूँ ,
फिर दुनियाँ भूल जाती हूँ।
मेरे हर गम में साथ तेरा है,
तेरे होने से खुश सवेरा है।
तु जो हँसता है मुझे हँसाने की खातिर,
मैं दर्द में भी हँस देती हूँ।
मैं जिसमें चुन-चुन कर कदम रखती हूँ,
जीवन का वो मार्ग मैं खुद ही बनाती हूँ।
तेरी आँखों में नज़र आता है स्वप्न मेरा,
जो मै हर रात सोते जगते देखती हूँ।
पर जब ओझल तू हो जाता है,
हर स्वप्न बुलबुले की तरह मिट जाता है।
मैं भी अपनी नादानी समझकर फिर गहरी नींद में सो जाती हूँ।
मैं जिसमें चुन-चुन कर कदम रखती हूँ,
जीवन का वो मार्ग मैं खुद ही बनाती हूँ।
-कविता यादव

Hindi Poem on Importance of Time-Waqt


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वक़्त
ना जाने वो पल हाथ से कैसे छूट गया
ना जाने कब कैसे कोई अपना रूठ गया
अनजान थी मैं हर एक वो चीज़ से
ना कोई अंदाज़ा रहा और
मेरा ख्वाब यू ही टूट गया
पर अब मुझे समझ आ गया
ख्वाब दूसरा आ जाएगा
वक़्त लेकिन चला जाएगा
वक़्त ऐसी चीज़ है जो
हँसाएगा ओर रुलायेगा |
– नेहा सॉ