Category Archives: Abstract Poems

Motivational Poem-Abhi Shuruwat Hai


जब हिम्मत टूटने लगे समझना अभी शुरुआत है !!

मिट जाएगा अंधेरा होगा नया सवेरा ज्यादा नहीं बस दो-चार पल की रात है.
जब हिम्मत टूटने लगे समझना अभी शुरुआत है !!

ऐसे नहीं मिलती मंज़िलें रास्ते चुन लो सही.
चलते रहो बनकर पथिक काँटों की परवाह कर नहीं.

पैरों में जब छाले पड़ेंगे दर्द छोटी बात है.
जब हिम्मत टूटने लगे तो समझना कि अभी शुरुआत है!! 

बर्फ से पाला पड़ेगा रुकने ना देना कदम .
सूर्य भी पिघलाएगा तब पड़ ना जाना तुम नरम .

अरमान बहने दो ना अब इम्तिहान की बरसात है .
जब हिम्मत टूटने लगे तो समझना कि अभी शुरुआत है !! 

सफर आधा कर लिया हिम्मत लगी जब टूटने .
कमज़ोर तुझको देख सब इज्जत लगेंगे लूटने .
बन रहा कलंक क्यों ? दुष्टों की यहां बारात है.

जब हिम्मत टूटने लगे तो समझना अभी शुरुआत है !! 

जितनी भी ठोकर खा रहा तू गिर रहा उठ कर के चल. 
हृदय में पत्थर बांध ले हर बार गिर गिर कर संभल.
मत हार हिम्मत होगी कल मंज़िल से मुलाकात है.

जब हिम्मत टूटने लगे तो समझना कि अभी शुरुआत है !! 

ये रास्ते होंगे कठिन मज़बूत तुमको कर रहे.

कि लड़ सको यमराज से तुम व्यर्थ में क्यों डर रहे ? 
टिकता समर में वीर वो हर शस्त्र जिसको ज्ञात है .

जब हिम्मत टूटने लगे तो समझना कि – अभी शुरुआत है !! 

ऐसे बन जाओ तुम हर खतरों से जो लड़ सको.

अर्जुन सा बन कर लक्ष्य के हर दुर्ग पर तुम चढ़ सको.

कहता है आर्यन सिंह इम्तिहान के बाद नव प्रभात है .

जब हम मत टूटने लगे तो समझना अभी शुरुआत है !! 

क्रांतिकवि आर्यन सिंह यादव

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Letter to Mother by Soldier-Ek Khat (Sainik Ka) Maa Ke Naam


*एक खत ( सैनिक का) माँ के नाम*
माफ करना माँ मै तुझे अलविदा ना कह सका,
तेरे आँचल में पल दो पल न रह सका
रोज याद तेरी आती थी,
छू कर मेरी रूह को गद गद कर जाती थी,

पर पता है माँ ,
इस मिट्टी की नरमी तेरे होने का हर पल मुझे आभास कराती थी
प्यार से चुम कर तेरी ही तरह सहलाती थी
रोज रात बाहे फैलाती थी
कण कण अपने छनकाकर लोरी सुनाती थी
फिर क्या!! रोज़ रात तुझसे मुलाकात हो जाती थी
जब सपनो में तू मेरे आकर मुस्काती थी
पर माँ,
तेरी मेरी मुलाकात का समा सपनो तक ही सीमित रह गया
तेरी रूह का चिराग , खुद अँधेरे में बह गया।

दहलीज पर बैठ कर ,तू मेरी राह तकती रही
आढ़ में यादो की बैठ ,तू बिलखती रही

पर लुटा कर अपना सब कुछ इस वतन पर, मैं तुझे कुछ ना दे सका
माफ करना माँ मैं तुझे अलविदा भी न कह सका ।।
– अभिलाषा सिंघल

Hindi Poem on Wind-Malay Sameer Tu Mand Mand Chal


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मलय समीर तू मंद-मंद चल
मलय समीर तू मंद-मंद चल।
कुसुम सुवास फैलाती जल थल
निर्झर से कल-कल स्वर,
नदियाँ की धार का कर्णप्रिय रव
सुनाती चल
मलय समीर तू मंद-मंद चल।
गिरी से तुषार कण की शीतलता
ठहरे नीर से निर्मलता लेती चल
मलय समीर तू मंद-मंद चल।
विहंगों का गान ,
अम्बर तक ऊँची उड़ान
से प्रमाण देती चल।
मलय समीर तू मंद-मंद चल।
मरूभूमि की धूली में सनती
जलधि में गोते लगाती चल
मलय समीर तू मंद-मंद चल।
कानन-कानन,विटप-विटप,
पर्ण -पर्ण हिलाती चल
मलय समीर तू मंद-मंद चल।
जलचर,थलचर,नभचर,उभयचर
को अपनी थपकी से सहलाती चल
मलय समीर तू मंद-मंद चल।
घाटी की गहराई नापती
गिरी शिखर की ऊँचाई नापती
मलय समीर तू मंद-मंद चल।
कुसुम की कोमलता,पत्थर की कठोरता,
हृदय की मृदुलता,मन की चंचलता
का अहसास कराती चल
मलय समीर तू मंद-मंद चल।
मिले जो नवयुवती तो उसके
कुंतल लहराती चल
विजय पताकाओं को भी नित
फहराती चल
मलय समीर तू मंद-मंद चल।
कृषक पसीने से तर जो मिले
तू उसका तन सुखाती चल
मलय समीर तू मंद-मंद चल।
खेतों में लहराती फसल में
सर सर शोर मचाती चल
मलय समीर तू मंद-मंद चल।
बहक गया जो छुअन से तेरी
उसका मन बहलाती चल
मलय समीर तू मंद-मंद चल।
-कविता कोसलिया

Hindi Poem on Motivation-Manzil


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मंज़िल
जो बढ़ा है ,अपना कदम आगे।
वो रुके ना किसी डर से पीछे।।
हमें हिम्मत से बढ़ना होगा।
नया आयाम फिर से घड़ना होगा।
ये मुश्किल कुछ पल की हट जायेगी।
हमे यकीं है, मंज़िल ज़रूर नज़र आएगी।।
-संजय

Hindi Poem on Honesty-Bhalai


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भलाई
है इस जगत में कोई सच्चाई ।
कोई कोई करे इसमें भलाई।।
सच्चे मार्ग पर चलने वाले,
दुःख पाते हैं पर वही जीत जाते हैं।
लाखों बाधा पार करे सच से ही
बस वार करे हर झूठ हराते है।।
-संजय