Category Archives: Abstract Poems

Hindi Poem on Identity Crisis-Kaun Hoon Main


कौन हूँ मैं
आग हूँ आगाज़ हूँ खुद की गलती छुपाने वाला राज़ हूँ
झूठा हूँ फ़रेबी हूँ कल से डरने वाला आज हूँ
ज़िंदा हूँ मैं ज़िन्दगी में खुद में ही बेतहशा हूँ
सपना हूँ मैं आगे का आज का ज़िंदा लाश हूँ
लम्हा हूँ में बीते कल का आज का बुरा ख्वाब हूँ
गर्मी की धुप सर्दी की छाँव अपने मंज़िल के विपरीत पाव हूँ मैं
उत्तर हूँ मैं आगे का आज का प्रश्न चिन्ह हूँ
धीमा हूँ ज़िन्दगी मैं कल के धावक के लिए तैयार हूँ
गलती हूँ मैं पीछे का आज का नया इंसान हूँ
आग हूँ आगाज़ हूँ खुद की गलती मिटाने वाला आज हूँ !

-बबलू नाथ

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Motivational Poem in Hindi-Sapna


जिंदगी में जब तू हार गया
बचा न कुछ भी अपना है
रहेगी अंतिम सांस तक जो
कुछ है तो तेरा सपना है।

हँसेंगे लोग तेरे सपने पे
खींचकर भी कोई गिरायेगा
हार न मानना इन मुश्किलों से कभी
हर मंजिल फतह कर दिखाना है
रहेगी अंतिम सांस तक जो 
कुछ है तो तेरा सपना है।

हार पराजय मुश्किलों को
अगर पकड़ तू रोता रहा
छूट जायेगी जिंदगी से ओ भी पल
जो तेरे पास पड़ा खजाना है
रहेगी अंतिम सांस तक जो
कुछ है तो तेरा सपना है।

लहरों से लड़कर जो जीता
ओ सिंधु में गोता लगायेगा
भर -भर झोला सपनों के मोती 
बाहर वो ले आयेगा
सपने बड़े होतें हैं जिनके
खोना भी उतना पड़ता है
रहेगी अंतिम सांस तक जो 
कुछ है तो तेरा सपना है।

-रंजन कुमार सिंह

Hindi Poem on Human Life-Manav


मानव

यह ज़िन्दगी तेरी मनुष्य,
मुसीबतों से भरी है,
यह किसीऔर ने नहीं,
बस, तूने स्वंय ने ही भरी है।

करता अगर संघर्ष ज़िन्दगी में,
तो होते न तेरे सपने दफन,
यूं न चला जाता दुनिया से,
ओढकर असफलता का कफन।।
-राजप्रीत हंस

Hindi Poem on God-Ishwar Ki Khoj


ईश्वर की खोज

मंदिर में गया
मस्जिद में गया
गिरिजाघर में गया
गुरुद्वारे में गया
पर ..भगवान् फिर भी ना मिला ….

चादर चढ़ाई
ज्योत जगाई
अर्ज़ी लगाई
पर …भगवान् फिर भी ना मिला…

भूखा रहा
प्यासा रहा
घंटों – घंटों जगता रहा
पर भगवान् फिर भी ना मिला …..

भूख के मारे बीमार हो गया
गरीब हो गया
अंत मे मिला ,अंत मे मिला पर जब मिला अपने अंदर ही मिला …..,

मिलते ही एक बात कही
मंदिर में ना मज़्जिद में ,
मै हूँ सबके चित्त (मन ) में ……|||

-सुमित सिहाग

Hindi Poem on Sleep-Neend


नींद तो जन्नत है ।
हर रात की मन्नत है ।

सुकून जिसमें है बहुत,
ये नींद की फितरत है।

क्या दर्द क्या चिंता है ।
ख्याबो में तो शोहरत है।

उनींदी आँखों से पूछो ,
नींद तो ज़रूरत है ।

जीवन से जब हो पलायन ,
हर वासना से उन्मत है ।

सक्रिय मुहूर्त के बाद ,
नींद तो जमैयत है।

-रीत (रितिका ) दाँगी