Hindi Poems on Emotions- कायर जिसे समझा

कायर जिसे समझा जाँबाज निकला
उसका अलग ही अंदाज निकला

बेचता रहा जो उम्र भर दवाइयाँ
बुढ़ापे में दवा को मोहताज निकला

ईमानदारी का ढिंढोरा पीटने वाला
खुद बेईमानों का सरताज निकला

जिसे हमने जहर समझकर फेंक दिया
हमारी बीमारी का इलाज निकला

मारे जाओगे अगर सत्ता के विरुद्ध
मुख से एक भी अल्फाज निकला

गैर को बदनाम मत कर ‘राहुल’
अपना ही अक्सर दगावाज निकला

  • राहुल रेड

Hindi Poem on Mosquito-मच्छर पर कविता

 

सर्दी की धूप में, गर्मी की छाँव में
शहर की भीड़ में, शांत सुखद गाँव में
कूड़े के ढेर में, पानी के गंदे संग्रह में
मैं मच्छर मिल जाता हूँ हर राह में
कभी मैं डेंगू फैलाऊँ
या मलेरिया मैं ले आऊँ
चिकनकुनिया हो या हो ज़ीका
बीमारी फ़ैलाने का मेरे पास तरीका
यदि रहना है मुझसे दूर
तो पहले रखो गंदे जल को दूर
घर में हो ओडोमॉस आल आउट का वास
लगा दो खूब सारे नीम के वृक्ष आस-पास
देर रात निकलो जो बाहर तो पहनो पूरे कपड़े
यह सब सावधानी से हम किसी को न जकड़ें

-अनुष्का सूरी