
सुंदर पंखों वाली तितली,
रंग रंगीली प्यारी तितली।
पंखों को तू है फड़काती,
फूल-फूल पर है मड़राती।
फूलों को तू बहुत चाहती,
फूल बिना प्यासी रह जाती।
फूलों से तू रस है भरती,
और ना जाने क्या-क्या करती?
कठिन परिश्रम तू है करती,
मानव से तू बहुत है डरती।
– सर्वेश कुमार मारुत
Sunder pankhon wali titli
Rang rangili pyari titli
Pankhon ko tu fadkati
Phul phul par hai mandrati
Phulon ko tu bhut chahti
Phul bina pyasi reh jati
Phulon se tu ras hai bharti
Aur na jane kya kya karti
Kathhin parishrm tu hai karti
Maanav se tu bhot hai darti
-Servesh Kumar Marut

सर्दी की धूप में, गर्मी की छाँव में
शहर की भीड़ में, शांत सुखद गाँव में
कूड़े के ढेर में, पानी के गंदे संग्रह में
मैं मच्छर मिल जाता हूँ हर राह में
कभी मैं डेंगू फैलाऊँ
या मलेरिया मैं ले आऊँ
चिकनकुनिया हो या हो ज़ीका
बीमारी फ़ैलाने का मेरे पास तरीका
यदि रहना है मुझसे दूर
तो पहले रखो गंदे जल को दूर
घर में हो ओडोमॉस आल आउट का वास
लगा दो खूब सारे नीम के वृक्ष आस-पास
देर रात निकलो जो बाहर तो पहनो पूरे कपड़े
यह सब सावधानी से हम किसी को न जकड़ें
-अनुष्का सूरी
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