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Hindi Poem on Monsoon-सावन की बौछारोँ


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सावन की बौछारोँ के मध्य,
एक ध्वनि परिचित-सी,
धीरे-धीरे बढ रही।
एक सूकून ह्रदय की दीवारोँ को बेधता,
मस्तिष्क मे पहुँचा, बोला-पहचान तो कर।
काफी इंतजार से क्षीण था,
एक संतुष्टी जगी प्रकट देखकर,
वह तो प्यारी बहना थी।
प्रीत की रीत से पूरित वह दिन आया है।
ईर्ष्या द्वेष की पराकाष्ठा छोड वादा निभाया है।
सावन भी आतुर है,एक झलक निमित्त से।
वह भी उमड-घुमड संदेश एक लाया है।
धागा नही,वह सूत्र है जिसमे छल लेशमात्र नही।
साक्षी है ईश मेरा,रक्षा रँहे,रक्षा करूं।
जरूरत नही किसी चीज की,
पा लिया संसार को।
शायद वह पूर्ण,मै भी परिपूर्ण हूँ।
बेटी वह फूल है,
जो हर बाग मेँ खिलता नहीँ।
कोशिश करो कितनी ही,
भाग्यविहीनो को मिलता नहीँ।
सुरमे की तरह शुध्द है वह,
पलकोँ पर विराजित करो।
बुराई के हर पशु को मानवता की अच्छाई से पराजित करो।
साल बीते,मास बीते,बीते दिन हजार।
माँ ढूँढती रह गई,
मिला न पुत्र का प्यार।
अब वही अबला पुत्री दे गई प्रेम सहस्त्रोँ बार।
बस अब न कहूँगा,मेरे शब्द मौन हुऐ।

-हितेश कुमार गर्ग

Savan ki bauchharon ke madhya,
Ek dhavni parichit- si ,
Dhire dhire badh rahi
Ek sukun hardya ki divaron ko bedhta
Mastishik me phucha
Bola pehchaan to kar
Kafi intezar se shin tha
Ek santushti jagi prkat dekhkar
Veh to pyari bhna thi
Preet ki reet se purit veh din aaya hai
Irshya dvesh ki prakashtha chor vada nibhaya hai
Savan bhi aatur hai ek jhalak nimat se
Veh bhi umad ghumad sandesh laya hai
Dhaga nahi hai veh sutar hai.
Jisme chal lesh matar nahi
Shakshi hai esh mera.
Rakhsha rahe rakhsha karu
Jarurat nahi kisi chij ki pa iya sansar ko
Sayad veh puran main bhi paripuran hoon
Beti veh fhul hai,
Jo har bagh mein khilta nahi
Koshish karo kitni hi,
Bhagyavahino ko milta nahi ,
Surme ki tarh sudh hai veh,
Palko par virajit karo
Burai ke har pashu ko manvta ki achai se prajeet karo
Saal bite, maas bite, bite din hzar .
Maa dhundti rah gai
Mila na putar ka pyar
Ab wahi abla putri de gayi prem shastron baar
Bas ab na kahuga mere shabd maun hue..

– Hitesh Kumar Garg

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Hindi Poems on Emotions-अनजान


पक्के मकान और कच्ची ईंटे ,
सच्चे मोती और झूठे  बोल ,
ख्वाहिशों के धागे को दिखावे की सुई से सीकर चल रहे है।
घर शमशान की राख पर नहीं बनना चाहिए ,
मगर उसी मिट्ठी के बन रहे है।
बड़े आँगन की चाह में झोपड़ी उखाड़ी ,
धूप से परदों की ओंठ में छिप रहे है।
चला जा रहा है कारवाँ रामायण का पाठ करवा कर ,
मगर खुद अपने रावण के दहन से बच रहे है।

-प्रभ पूरी

Pakke Makan Or Kacchi Inte ,
Sacche Moti Or Juthe Bol ,
Khawahiso Ke Dhage Ko Dikhave Ki Sui Se Sikar Chal Rhe Hai …
Ghar Samsaan Ki Raakh Par Nhi Banna Chahiye ,
Magar Usi Mitthi Ke Ban Rhe Hai .
Bade Aagan Ki Chah me Jopadi Ukhaadi ,
Dhoop Se Pardo ki Onth me Chip Rhe Hai .
Chala Ja Rha Hai Karwa Ramayan Ka Paath Karwa Kar ,
Magar Khud Apne Ravan Ke Dehan Se Bach Rhe Hai ..

-Prabh Purii

Hindi Poem on Mother – माँ की गोद


माँ की गोद में खेलता बचपन,
पापा के साथ हँसता बचपन |
सीढियों पे दौड़ता बचपन,
झूलों पे झूलता बचपन |
मिट्टी में लुडकता बचपन,
बाइक पे सवारी करता बचपन |
याद आता है मुझे मेरा बचपन,
सोचती हूँ क्यों होता है ये बचपन |
सोचते थे की बड़े हो जाये, तो
सब पर अपना हुकुम चलाये |
पर अब सोचते है फिर से छोटे हो जाये,
तो अनजाने में ही सब पर हुकुम चलाये |
माँ की गोद में खेलता बचपन,
पापा के साथ हँसता बचपन |

-जाह्नवी इस्तवाल

Maa ki god mein khelta bachpan
Papa ke sath hasta bachpan
Siddiyon pe dodta bachpan
Jhulon pe jhulta bachpan
Mitti me ludakata bachapn
Bike pe swari karta bachapn
Yaad aata hai muje mera bachapn
Sochti hu kyu hota hai ye bachapn
Sochte they ki bade ho jayege to
Sab par apna hukum chalaye
Par ab sochte hai fir se chote ho jaye
To anjane me hi sab par hukum chalaye
Maa ki god mein khelta bachpan
Papa ke sath hasta bachpan

-Jahnavi Istwal

Hindi Poems on Emotions- कायर जिसे समझा


कायर जिसे समझा जाँबाज निकला
उसका अलग ही अंदाज निकला

बेचता रहा जो उम्र भर दवाइयाँ
बुढ़ापे में दवा को मोहताज निकला

ईमानदारी का ढिंढोरा पीटने वाला
खुद बेईमानों का सरताज निकला

जिसे हमने जहर समझकर फेंक दिया
हमारी बीमारी का इलाज निकला

मारे जाओगे अगर सत्ता के विरुद्ध
मुख से एक भी अल्फाज निकला

गैर को बदनाम मत कर ‘राहुल’
अपना ही अक्सर दगावाज निकला

  • राहुल रेड

Hindi Poems on Emotions – बदनामी


 

महफ़िल सजा ली यारों की, तो हुई बदनामी
बगिया खिला ली बहारों की, तो हुई बदनामी
यह कैसा समाज, जो बदनाम करता फिरता है?
मदद कर दी बेसहारों की, तो हुई बदनामी।

किसी पे दिल अगर ये मर लिया, तो हुई बदनामी
बाँहों में किसी को भर लिया, तो हुई बदनामी।
बदनामी के दौर में भला कौन है बदनाम नही?
कभी प्यार किसी से कर लिया, तो हुई बदनामी

अगर आजदी से घूम लिया, तो हुई बदनामी
महफ़िल में कभी झूम लिया, तो हुई बदनामी
प्रेम को बदनाम कर दिया जालिमो ने इतना
माथा जो उसका चूम लिया, तो हुई बदनामी।

रोकूँ कैसे यारों आज होने से बदनामी?
स्याही के कुछ दाग भी धोने से बदनामी
जिसको पाकर बदनाम ही बदनाम हुआ हूँ
छोड़ दूँ अगर साथ उसे खोने से बदनामी।

जब ज्यादा हो पैसा, तो होती है बदनामी
चाहें गरीब हो कैसा, तो होती है बदनामी
जब बदनामी का दौर है, फिर मैं कैसे बचूँ?
हो इन्शान मेरे जैसा, तो होती है बदनामी।

अक्सर समाज में हर जगह मिलती है बदनामी
बहारों में भी फूल की जगह खिलती है बदनामी
कोई बताये वो जगह, जहाँ होतीं ना बदनामी
जिधर देखो हर जुबान से निकलती है बदनामी।

कांटे नही उससे बढ़कर है सुई बदनामी
हवा से हल्की उड़ने वाली रुई बदनामी
जितना खुद को रोका बदनाम होने से
उतनी ज्यादा और अक्सर हुई बदनामी।

– राहुल रेड

Mehfil sja li yaron ki, to hue badnami
Bagiya khila libaharon ki to hue badnam
Yeh kesa smj hai jo badnaam krta firta hai
Madd kar di besharon ki to hue badnam

Kisi pe dil ye mar liya to hue badnami
Bahon me kisi ko bhr liya to hue badnami
Badnami k dor me bha kon hai bad man nahi
Kabhi pyar kisi se kar liya to hue badnami

Agar ajadi se ghoom liya to hue badnami
Mehfil me kabhi jhoom liya to hue badnami
Prem ko badnam kar diya jalimo ne etna
Matha jo uska chum liya to hue badnami

Roku kese yaron aaj hone se badnami
Syahi k kuch daag dhone se badnami
Jisko pa kar badnaam hi badnaam hua hoon
Chor du aggr sath use khone se badnami

Jab jyada ho pesa to hoti hai badnami
Cahe garib ho kesa to hoti hai badnami
Jab badnami ka daur hai fir main kese bachu
Ho insaan mere jesa to hoti hai badnami

Aksar smaj me har jagh milti hai badnami
Baharon me bhi ful ki jagh khilti hai badnami
Koi btaye wo jgh jha hoti na badnami
Jidhr dekho har jubann se niklti hai badnami

Kate nahi usse badkar hai sui badnami
Hwa se halki udne wali rue badnami
Jitna khud ko roka badnam hone se
Utni jyada aur aksr hue badnami

– Rahul Red