Hindi Poem on life

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Hindi Poem Encouraging Change-Badalte Zamaane Ke Sath

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बदलते ज़माने के साथ

बदलते ज़माने के साथ हम भी बदलते गए
जीवन में वक्त के साथ बदलते रंगो को जीवन में भरते गए।
ज़माने में हर तरह के लोग मिले
बस सब के साथ कदम मिलाकर आगे बढते गए
हमारी तो क्या औकात है
रास्ता तो ईश्वर ने दिखाया
बस हम तो उस पर चलते गए।
बदलते ज़माने के साथ हम भी बदलते गए,
बदलते ज़माने के साथ हम भी बदलते गए।।

बचपन की यादों को साथ लिए
हमने जवानी में कदम रखा है।
बचपन तो बीत गया खेल कूद में
अब तो वक्त ने भी अपना रुख बदल रखा है,
जीवन के हर मोड़ से बचपन हो या जवानी
हम तो बस सीखते चले गए
बदलते ज़माने के साथ हम भी बदलते गए,
बदलते ज़माने के साथ हम भी बदलते गए।।

-रोहित 

Hindi Poems on Life- ज़िन्दगी का तज़ुर्बा

बे क़दरों  में रहे हम

बे क़दरों में रहे हम
क़दर हमें अपनी ही न थी
कदरदानों में जाके देखा
इतने बुरे तो हम भी नहीं
सजती है मेरी शिरक़त से आज महफ़िल
इतनी ऊँची क्या पता था
ज़िन्दगी का तज़ुर्बा यह मुक़ाम देगा
दौर हम पे ऐसे भी गुज़रा है
ए हसीन जब बाज़ार से आँखे भर कर
खाली हाथ लौट आये करते थे हम

-हसीन कुरेशी


Bekadron mein rahe hum
Qadar humein apni hi na thi
Qadrdano main jake dekha
Itne bure toh hum bhi nahi
Sajati hai meri shiraqt se aaj mehfheel
Inti oonchi kya pata tha
Zindagi ka tajurba yeh muqam dega
Daur hum pe aisa bhi guzara hai
Aye haseen jab bazaar se aankhein bhar kar
Khali haath laut aya karte the hum

-Hasin Qureshi