जीवन क्रम
हर पल हमें कुछ
सिखाती है ज़िन्दगी
भेद हर रिश्ते का
बताती है ज़िन्दगी
फँस माया के जाल में
रहते मद से चूर है हम
खुल जाती है आँख कभी तो
असलियत कई बार
दिखती है ज़िन्दगी
नहीं ज़रूरी
हर रास्ता हो गुलज़ार
कभी काँटों की चुभन भी
महसूस कराती है ज़िन्दगी
गहरा है रिश्ता बहुत
फूल और काँटों का
मेल उनका भी कभी
दर्शाती है ज़िन्दगी
जीवन के हर पहलू से
वाकिफ कराती है ज़िन्दगी
भूले रहते हैं
दिन और रातों में हम
सच्चाई जीवन की
बताती है ज़िन्दगी
सामना तूफानों से हो जाता है अक्सर
बहारों और फिज़ाओं का ही
नाम है ज़िन्दगी
फ़िज़ाएं एक सी रहती नहीं
कभी धुप तो
कभी छाँव है ज़िन्दगी
हसीं मंज़ाओं में कभी
खो जाते हैं हम
कभी पतझड़ का मौसम भी
लाती है ज़िन्दगी
इस जीवन में
हर चीज़ के पहलु हैं दो
कभी रुलाती
तो कभी हंसाती है ज़िन्दगी
समझ पाएं कभी
जो जीवन क्रम को हम
तो बस आने और जाने का
नाम है ज़िन्दगी -किरण गुलाटी
आवाज़ों से नहीं इंसानों से बात करता हूँ
आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ
खूब रहा मैं बनकर अजनबी खुद से
आज दिल-लगी करने की गुज़ारिश करता हूँ
ये ना समझो हमदर्द बहुत हैं इस शहर में
मैं आज भी दुश्मनों का इंतज़ार करता हूँ
जो पीते हैं नशीले जाम उनकी वो जाने
मैं तो आज भी गम का ज़हर पिया करता हूँ
ना जाने कब हो जाये खुदा का रहमों करम मुझ पर
दिन रात तुम्हारा सजदा किया करता हूँ -अनुष्का सूरी
रेत का हाथों से फिसलने में वक़्त अभी बाकी है
एक लहर गुज़री है दूसरी का लौट के आना अभी बाकी है
कल जो गुज़रा था उसका कल लौट के आना अभी बाकी है
बहुत दिन गुज़ारे हैं अश्क बहा कर फिर से मुस्कुराना अभी बाकी है
गलती ना हो जाये बस यही सोच डरता रहा गलती करके पछताना अभी बाकी है
रात थी लम्बी तो लगा अंधेरे का है राज, सुबह का फिर नयी रोशनी लेकर लौट आना अभी बाकी है
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