Hindi Poems on Philosophy of Life

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Philosophical Poem on Life-Ehsas

एहसास

न दिन होता,

न रात होती तो ज़िन्दगी यूँ ही तमाम न होती न समय की धारा होती ,

न पलों का हिसाब होता न रंजिशें होती,

न शिकवा होता दूर दूर एक फैला समंदर होता

आकाश तारों से आच्छादित होता कभी मैं सागर की तरंगें बनती ,

तो कभी तारों से खेलती आँख मिचौली न अपने होने का एहसास,

न चिंता कोई भी एक अविरल धारा में बहती हुई कभी चैतन्य में विलीन ,

तो कभी चैतन्य स्वरुप आकार में स्थित उस शिल्पकार की कृति…..

कभी व्यक्त तो कभी अव्यक्त

-सुरेखा कोठारी

Ehsas

Na din hota,

na raat hoti to,

Zindagi yun hi tamaam na hoti

Na samay ki dhaaraa hoti,

Na palon ka hisaab hota na ranjishein hoteen,

Na shikwa hota dur dur tak ek faila samander hota

Aakaash taaron se achhadit hota kabhi main saagar ki tarangen banti,

To kabhi taaron se khelti aankh michauli na apne hone ka ehsaas,

Na chinta koi bhi ek aviral dhaara mein behti hui kabhi chaitanya mein vileen,

To kabhi chaitanya swaroop aakaar mein sthit us shilpakaar ki kriti…..

kabhi vyakt to kabhi avyakt

-Surekha Kothari

Poem in Hindi on Philosophy-आवाज़ों से नहीं

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आवाज़ों से नहीं इंसानों से बात करता हूँ
आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ
खूब रहा मैं बनकर अजनबी खुद से
आज दिल-लगी करने की गुज़ारिश करता हूँ
ये ना समझो हमदर्द बहुत हैं इस शहर में
मैं आज भी दुश्मनों का इंतज़ार करता हूँ
जो पीते हैं नशीले जाम उनकी वो जाने
मैं तो आज भी गम का ज़हर पिया करता हूँ
ना जाने कब हो जाये खुदा का रहमों करम मुझ पर
दिन रात तुम्हारा सजदा किया करता हूँ
-अनुष्का सूरी