Tag Archives: Hindi Poem on Philosophy

Hindi Poem on Time-अभी बाकी है 


रेत का हाथों से फिसलने में वक़्त अभी बाकी है Time
एक लहर गुज़री है दूसरी का लौट के आना अभी बाकी है
कल जो गुज़रा था उसका कल लौट के आना अभी बाकी है
बहुत दिन गुज़ारे हैं अश्क बहा कर फिर से मुस्कुराना अभी बाकी है
गलती ना हो जाये बस यही सोच डरता रहा गलती करके पछताना अभी बाकी है
रात थी लम्बी तो लगा अंधेरे का है राज, सुबह का फिर नयी रोशनी लेकर लौट आना अभी बाकी है