
मानव
यह ज़िन्दगी तेरी मनुष्य,
मुसीबतों से भरी है,
यह किसीऔर ने नहीं,
बस, तूने स्वंय ने ही भरी है।
करता अगर संघर्ष ज़िन्दगी में,
तो होते न तेरे सपने दफन,
यूं न चला जाता दुनिया से,
ओढकर असफलता का कफन।।
-राजप्रीत हंस

मानव
यह ज़िन्दगी तेरी मनुष्य,
मुसीबतों से भरी है,
यह किसीऔर ने नहीं,
बस, तूने स्वंय ने ही भरी है।
करता अगर संघर्ष ज़िन्दगी में,
तो होते न तेरे सपने दफन,
यूं न चला जाता दुनिया से,
ओढकर असफलता का कफन।।
-राजप्रीत हंस

जीवन का मार्ग
मैं जिसमें चुन -चुन कर कदम रखती हूँ,
जीवन का वो हर मार्ग मैं खुद ही बनाती हूँ।
एक भूलभूलैया सा नज़र आता है खुद की आँखों में,
मै अपनी नज़रों में ही खो जाती हूँ।
जीवन किसी रेल सा गुजरता है,
मैं किसी पुल की भाँति कंपकंपाती हूँ।
मै जिसमें चुन-चुन कर कदम रखती हूँ,
जीवन का वो मार्ग मैं खुद ही बनाती हूँ।
मैं जब तेरे बारे में सोचती हूँ ,
फिर दुनियाँ भूल जाती हूँ।
मेरे हर गम में साथ तेरा है,
तेरे होने से खुश सवेरा है।
तु जो हँसता है मुझे हँसाने की खातिर,
मैं दर्द में भी हँस देती हूँ।
मैं जिसमें चुन-चुन कर कदम रखती हूँ,
जीवन का वो मार्ग मैं खुद ही बनाती हूँ।
तेरी आँखों में नज़र आता है स्वप्न मेरा,
जो मै हर रात सोते जगते देखती हूँ।
पर जब ओझल तू हो जाता है,
हर स्वप्न बुलबुले की तरह मिट जाता है।
मैं भी अपनी नादानी समझकर फिर गहरी नींद में सो जाती हूँ।
मैं जिसमें चुन-चुन कर कदम रखती हूँ,
जीवन का वो मार्ग मैं खुद ही बनाती हूँ।
-कविता यादव

ये ज़िन्दगी
जीने की चाह सभी को होती है सदा।
ये ज़िन्दगी नये सपने संजोती है सदा।।
अपने अरमानों को हम सजाएँ।
इन्हें और भी खूबसूरत बनाएँ।।
बन जाये बेहतर आज, कल अपना।
सदा शांति से गुज़रे हर पल अपना।।
अपनी गलती को हम सुधारें।
अच्छी दृष्टि से सबको निहारें।।
-संजय
Ye Zindagi
Jeene ki chah zabhi ko hoti hai sada
Ye zindagi naye sapne sanjoti hai sada
Apne armaano ko ham sajayein
Inhein aur bhi khoobsurat banayein
Ban jaye behatar aj, kal apna
Sada shanti se guzre har pal apna
Apni galati ko ham sudharein
Acchi drishti se sabko niharein
-Sanjay (Poet)

ज़िन्दगी सांसों की गुलाम क्यों है?
हुकूमतें सहती, सुबह शाम क्यों है?
हर लम्हा बताता है, हम हैं तो तुम हो
कैसे गुमान करें, ज़िन्दगी हैरान क्यों है?
अटकती है, चलती है, रुकती है कभी
भारी ज़िन्दगी पे खुले आम क्यों है?
-अविनाश
Zindagi sanson ki gulaam kyo hai?
Hukumatein sehti, subah-sham kyo hai?
Har lamha batata hai, ham hain to tum ho
Kaise gumaan karein, zindagi hairan kyo hai?
Atakti hai, chalti hai, rukti hai kabhi
Bhaari zindagi pe khule aam kyo hai?
-Avinash (Poet)

जीवन तो मौजों की धारा में बहना चाहता है
पर वैसा नहीं होता, जो मन कहना चाहता है।
सामने जो आती मुश्किलें रोकें तो कैसे रोकें?
ये आती है जाने क्यूँ?और नहीं दिल सहना चाहता है
हमें इतनी खबर तो नहीं जो जान सकें कुछ भी
कुछ जान लें चाहे पर मन चैन से रहना चाहता है
न रोक सके कोई आते-जाते मन के विचारों को
रंग भरे सपनों में मन और हँसी रंग भरना चाहता है
-संजय