Hindi Poem on Crime Against Women – Choti Si Gudiya

छोटी सी गुड़िया
माँ और बाबुल की
खुशियों की पुड़िया

नाज़ों से उसको था पाला
ज़माने की बुरी नज़र से
सदा उसको संभाला

लेकिन विधाता को
था कुछ और ही मंज़ूर
दरिंदों राक्षसों के हाथों
हुई वो चकना चूर

न हैवानियत की कोई हद्द है
और अगर कोई थी भी
तो वो सब अब रद्द है

आज तो समाज में
क्रूरता और छल का
है नंगा नाच

दूसरे का सर कुचल दो
पर खुद की हवस
पर न आये आंच

ये कैसा भारत है
मैं देख कर हूँ हैरान
क्या ये वही भूमि है जहाँ
सीता राम की है अभिमान

कुछ करो देशवासियों
भगवन से ज़रा तो डरो
ऐसे भयंकर पाप
करने से पहले तुम डरो

अगर नहीं माना तुमने
और फिर भी किया मन-माना
तो फिर नरक में रह कर होगा
कल्पों तक बस पछताना

  • अनुष्का सूरी

3 thoughts on “Hindi Poem on Crime Against Women – Choti Si Gudiya

  1. भारत एक कृषि प्रधान देश है। ये कहना भी गलत नहीं होगा कि भारत एक पुरुष विकृति जाति से ग्रसित देश भी है।भारत को आजादी के 72 साल पूरे हो गए हैं लेकिन अभी भी भारत की जीडीपी जिस दर से गिर रही है उस से कहीं तेजी से भारत मे नैतिकता जोकि विशेष रूप से इस पुरुष द्वारा अधिकृत समाज में महिलाओं की स्थिति में गिरावट हो रही है। सीता और मीरा का जब ये देश नहीं हुआ और प्रभु श्री राम जोकि आदर्श पुरुष थे उन्होंने भी उनकी अग्नि परीक्षा समाज के कुछ कलंकित और गिने चुने हुए लोगों के कहने पर लिया। समाज एक ऐसा गंदा वृत है जिसके अंदर केवल पाखंडी और दोगले लोगों का जमाव है। भारत की 68% जनसंख्या अभी भी ग्रामीण है और शिक्षा के नाम पर केवल धंधा और फर्जी स्कूल के साथ साथ फर्जी अध्यापकों से भरे पड़े है। घर में टीवी पर अगर कोई ऐसा दृश्य या ऐसा प्रचार आ जाता है तो सबका चेहरा शर्म से लाल हो जाता है । बायोलॉजी हमे क्लास 6 से पढ़ाई जा रही तो ये घर के लोग ये क्यूं नहीं समझते की बच्चे को इसकी जानकारी नहीं होगी। क्या भारत में को १२५ मिलियन लोग है वो कहां से आए हैं? जब तक हम अपने घर में पीरियड्स से लेकर कंडोम की बात छुपाएंगे तब तक आप ये रेप और छेड़ छाड़ की घटनाओं को रोक नहीं सकते। नैतिक शिक्षा उतनी ही जरूरी है जितना गणित और विज्ञान। भारत के नेताओं कि अकेले की जिम्मवारी नहीं है ये। हर घर और हर स्कूल में बच्चों को ये सिखाना जरूरी है।हमारे यहां अभी भी ब्वॉयज और गर्ल्स स्कूल है।शर्म की बात है कि हम अभी भी आदिमानव जैसे जी रहे है। भारत को रवांडा देश में गाय दान करने से यहां की लड़कियां सुरक्षित नहीं होंगी। मुझे इस पुरुष जाति में होने पर कलंक महसूस होता है। क्या किसी की मा और बहन बेटियां नहीं है। चाहे वो अमीर हो या गरीब।मै यहां समानता कि बात नहीं कर रहा हूं।मै यहां जो जिसका हक है और जो जैसे रहना चाहता है रहने दो ये कह रहा हूं।मै ये बात यहां इसलिए लिख रहा हूं क्योंकि आजकल इंटरनेट लगभग सबके पास हैै। और मै कोई बड़ा आदमी या चोर नेता हूं नहीं कि मेरी बात भारत कि चोर मीडिया आए और पूछे।भारत के स्कूलों में सुधार की जरूरत है। भारत के घरों में सुधार की जरूरत है। नहीं चाहिए भारत को चांद पर पानी खोजना अगर भारत में अभी भी सबसे ज्यादा गरीब है और भारत भुकमरी इंडेक्स में पाकिस्तान जैसे देशों से भी पीछे है।
    हर एक व्यक्ति को आगे आकर हमें इन चीजों पर बात करनी चाहिए न कि मोदी जी कौनसी जैकेट पहनते हैं और न ही वो ब्लेड जानना है जिससे योगी आदियतनाथ अपना खोपड़ी का बाल साफ़ करते हैं।
    मीडिया भारत कि चोर है और थी और रहेगी।
    अगर कोई सुधार सकता है और सुधर सकता है तो वो हम खुद है।
    ये उदासीनता कल भारी पड़ेगी,जब आप के लिए कोई नहीं खड़ा होगा। नोटा को वोट दीजिए।
    मुझे इतना लिखना है कि मै आपको बता नहीं सकता लेकिन बस इतना कहूंगा भारत को देश बनाइए जहां बेटियां सुरक्षित हो।
    न्यायपालिका अगर चिदम्बरम का केस रात में भी सुन सकती है और उसके बेल के लिए कोर्ट की डेट जल्दी जल्दी ला सकती है तो रेप करने वाले उन तमाम हरामियों को फांसी क्यूं नहीं दे सकती है?
    अगर भारत के खिलाफ बोलना फांसी है तो भारत के अंदर ही भारत में हमारी बेटियों और मा और बहनों के साथ ऐसे कुकर्म करने वालों को फांसी क्यूं नहीं है?
    अगर कोर्ट के खिलाफ बोलना कोर्ट ऑफ कंटेंप्ट है तो इस दोष के लिए फांसी क्यूं नहीं?
    अगर 16 साल के नीचे एक नीच मानव जाति और पुरुष जाति कुकर्म कर सकता है तो उसको फांसी क्यूं नहीं?
    मै तो कहता हूं उसके पूरे घर वालो को भी उम्रकैद या फांसी होनी चाहिए।
    क्या संविधान में लिखे आर्टिकल्स लक्ष्मण रेखा है? बिल्कुल नहीं। सरकार और न्यापालिका को जब भी जरूरत पड़ती है तो वो उसको हटा देती है। तो भारत के नागरिकों के लिए सीआरपीसी और आईपीसी में क्यूं नहीं कोई प्रावधान है ऐसा?
    ये केवल मानवकृत है।
    मै हार चुका है इस देश के दोगलेपन से।
    चाहे वो कार्यपालिका हो या न्यायपालिका।
    सब चोर हैं।
    भारत के लोग भी चोर है।
    हम भी चोर हैं।
    #boycottElections #boycotVoting #WeStandWithWomens

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