जिंदगी में जब तू हार गया बचा न कुछ भी अपना है रहेगी अंतिम सांस तक जो कुछ है तो तेरा सपना है।
हँसेंगे लोग तेरे सपने पे खींचकर भी कोई गिरायेगा हार न मानना इन मुश्किलों से कभी हर मंजिल फतह कर दिखाना है रहेगी अंतिम सांस तक जो कुछ है तो तेरा सपना है।
हार पराजय मुश्किलों को अगर पकड़ तू रोता रहा छूट जायेगी जिंदगी से ओ भी पल जो तेरे पास पड़ा खजाना है रहेगी अंतिम सांस तक जो कुछ है तो तेरा सपना है।
लहरों से लड़कर जो जीता ओ सिंधु में गोता लगायेगा भर -भर झोला सपनों के मोती बाहर वो ले आयेगा सपने बड़े होतें हैं जिनके खोना भी उतना पड़ता है रहेगी अंतिम सांस तक जो कुछ है तो तेरा सपना है।
जीवन का मार्ग
मैं जिसमें चुन -चुन कर कदम रखती हूँ,
जीवन का वो हर मार्ग मैं खुद ही बनाती हूँ।
एक भूलभूलैया सा नज़र आता है खुद की आँखों में,
मै अपनी नज़रों में ही खो जाती हूँ।
जीवन किसी रेल सा गुजरता है,
मैं किसी पुल की भाँति कंपकंपाती हूँ।
मै जिसमें चुन-चुन कर कदम रखती हूँ,
जीवन का वो मार्ग मैं खुद ही बनाती हूँ।
मैं जब तेरे बारे में सोचती हूँ ,
फिर दुनियाँ भूल जाती हूँ।
मेरे हर गम में साथ तेरा है,
तेरे होने से खुश सवेरा है।
तु जो हँसता है मुझे हँसाने की खातिर,
मैं दर्द में भी हँस देती हूँ।
मैं जिसमें चुन-चुन कर कदम रखती हूँ,
जीवन का वो मार्ग मैं खुद ही बनाती हूँ।
तेरी आँखों में नज़र आता है स्वप्न मेरा,
जो मै हर रात सोते जगते देखती हूँ।
पर जब ओझल तू हो जाता है,
हर स्वप्न बुलबुले की तरह मिट जाता है।
मैं भी अपनी नादानी समझकर फिर गहरी नींद में सो जाती हूँ।
मैं जिसमें चुन-चुन कर कदम रखती हूँ,
जीवन का वो मार्ग मैं खुद ही बनाती हूँ। -कविता यादव
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