Tag Archives: Rape is crime poem

Hindi Poem on Save Girl Child-बचाऊं कैसे


आंखों के ख्वाब मिटा दूं रात भर जागकर,
पर दिल के ख्वाब मिटाऊं कैसे।
आहट पाते ही जिसकी मातम छा गया,
उसके जीवन की आश लगाऊं कैसे।
बड़ी जहमत से जवां हुआ ये फूल,
दुनियां की नजर इस से हटाऊं कैसे,
दरिंदों की नीयत तो कहीं भी डोल जाती है,
चेहरा नकाब से छुपाऊं कैसे।
खुदा का सौदा कर लिया धर्म के इजारेदारों ने
खिदमत की गुहार उससे लगाऊं कैसे ।
जोश चाहिए जिगर में ये दौर बदलने की खातिर,
बगावत के लिए उन्हें उकसाऊं कैसे।
आवाज उठाने की खातिर दिल बेताब है मेरा,
पर समाज से दामन छुड़ाऊ कैसे।
उसकी जंग का एक लम्हा सब कुछ बदल देगा ,
बेटी के दुश्मनों को ये समझाऊं कैसे।
बेटी ही साथ देने चली बेटी के कातिलों का,
फिर रोज मरती बेटियां बचाऊं कैसे।

Aankhon ke khwab mita doon raat bhar jaagkar
Par dil ke khwab mitau kaise
Aahat pate hi jiski maatam chha gaya
Uske jivan ki aash lagaun kaise
Badi zehmat se jawa hua ye phool
Duniya ki nazar es se hatau kaise
Darindon ki niyat to kahi bhi dol jati hai
Chehra nakab se chupaun kaise
Khuda ka sauda kar liya dharm ke ijaredaron ne
Khidmat ki ghuhaar usse lgaun kaise
Josh chahiye jigar mein ye dour badlne ke khatir
Bgavat ke liye unhe uksaun kaise
Aawaj uthane ke khatir dil betab hai mera
Par samaj se daman chudau kaise
Uski jang ka ek lamha sab kuch badal dega
Beti ke dushmano ko ye samjhaun kaise
Beti hi sath dene chali beti ke katilon ka
Fir roz marti betiyaan bachaun kaise

-Monika 

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Hindi Poem on Rape Crime- कितनी मासूम है


कितनी मासूम है तेरी एक वो आवाज़
जी चाहता है मासूमियत से सुनती जाऊँ तेरी वो आवाज़
तेरी आवाज़ में आग महसूस किया है मैंने
जो लाखों बेजान दिलों में एक आस जगा देगी
तेरी आवाज़ में वो चिंगारी है जो निकलती तो मासूमियत से है
पर एक तबदील हो जाती है जब मैंने तेरी आवाज़ में
वो जज्वा महसूस किया तो समझा ये नारी में ही है और नारी में ही हो सकता है
तू तैयार है इसमें भी तेरी मासूमियत झलकती है
जिस दरंदगी से उन दरिन्दो ने तेरी मासूमियत बहरी आवाज़ को कुचल कर तार तार किया
देश की एक बेटी का नहीं नारी के हर रूप का बलत्कार हुआ है
मासूम सी थी इस की सिर्फ एक खाव्हिश ज़िन्दगी जीने की छिन ली
उन दरिंदो उसकी वो आवाज़ जो उसकी ताकत थी
जो लाखों दिलों पे राज़ करने के लिये पागल थी
ये हर उसकी लड़की के लिये है जिसकी आवाज़ को हमेशा दबाया जाता है

नेहा

 

Kitni masoom hai teri ek wo awaz
Jee chahta h masoomiyat se sunti jaau teri wo awaz
Teri awaz me wo aag mehsus kiya hai maine
Jo laakho bejaan dilo me ek aas jaga degi
Teri awaz me wo chingari hai Jo nikalti to masumiyat se hai
Par ek jwalamukhi me tabdeel ho jaati hai Jb maine teri awaz me
wo jazbaa mehsoos kiya to samjha ye naari me hi hai or narri me hi ho skta hai
Tu tayar hai es me bhi teri masumiyat jahlakti hai
jis darindagi se un darindon ne teri masoomiyat bheri
Awaz ko kuchal kar ke taar taar kiya..
Desh ki ek beti ka nhi naari ke har roop ka balatkar hua hai
Masoom si thi es ki sirf ek khawhish zindgi Jeene ki chhin li
Un darindo uski wo awaz Jo uski taakat thi
Jo laakho dilon pe raaj karne ke liye pagal thi
Ye har uski ladki ke liye hai jiski awaz ko hmesha dbaaya jaata hai

Neha

 

Hindi Poem on Rape- आदम खोर दरिन्दें


कब खूनी खेल खत्म होगा,
इन आदम खोर दरिन्दों का,
बचपन छीन न जाए इनका,
नन्हें इन परिन्दों का,
अगला शिकार कौन हो इनका,
पता नहीं इन छरिन्दों का,
हँसनें से भी डर लगता है,
सहम जाती हूँ ये देख कर,
कब शिकार होना पड़े,
इन आदम खोर दरिन्दों का,
कब खूनी खेल खत्म होगा,
इन आदम खोर दरिन्दों का।

गरीना बिश्नोई

Kab khuni khel khtam hoga
En aadam khor darindo ka
Bachpan chin na jaye enka
Nanhe en parindo ka
Agla shikar kon ho inka
Pta nahi en charchindo ka
Hasne se bhi dar lagta hai
Sham jati hoon ye dekh kar
Kab shikar hona pade
En aadamkhor darindo ka
Kab khuni khel khtam hoga
En aadam khor darindo ka

-Garina Bishnoi

Hindi Poem on Rape of 100 year old woman in India- १०० वर्ष की बुढ़िया संग बलात्कार हुआ


१०० वर्ष की बुढ़िया संग बलात्कार हुआ

पढ़कर ये खबर देश शर्मसार हुआ

उज्जवल भारत के सपने देखे थे जिन आँखों ने

देख कर ये भविष्य ह्रदय में पीड़ा, मन में भय आपार हुआ

१०० वर्ष की बुढ़िया संग बलात्कार हुआ

पढ़कर ये खबर देश शर्मसार हुआ

जिन हाथों को देता कोई सहारा

जिस माँ को था हर बच्चा प्यारा

उसी बूढ़े जिस्म पर अत्याचार हुआ

१०० वर्ष की बुढ़िया संग बलात्कार हुआ

पढ़कर ये खबर देश शर्मसार हुआ

पढ़ना लिखना भारतीय होना सब बेकार हुआ

जिस क्षण भारतीय प्रान्त में ऐसा दुराचार हुआ

१०० वर्ष की बुढ़िया संग बलात्कार हुआ

पढ़कर ये खबर देश शर्मसार हुआ

-अनुष्का सूरी

This poem has been written after reading the painful news of a 100 year old woman raped by a drunk youth in Uttar Pradesh. It is unfortunate that Indian value system is no more given importance by youth. The disastrous impact of alcohol on human intellect is clearly demonstrated via this incident. It is also a sorry state of affairs for law, ethics and morality in India. I feel ashamed to read such a news story in India.

Here is an English translation:

A 100 year old woman was raped

The entire country (India) is ashamed after reading this news

The eyes which had dreamt about a bright and developed India

Seeing this future, the heart is full of pain and the mind is fearful

A 100 year old woman was raped

The entire country (India) is ashamed after reading this news

The hands which could have been comforted by the young

A mother for whom every child was dear

Her old, weak body was mishandled

A 100 year old woman was raped

The entire country (India) is ashamed after reading this news

It is futile to be educated or be called an Indian as I read this news today

The moment such a heinous crime was committed in a sector of the land of spirituality- India

A 100 year old woman was raped

The entire country (India) is ashamed after reading this news

-Anushka Suri

Hindi Poem on Rape – बेटी की अस्मत


कुण्डी ना खड़काओ चुप रहो आज महीनो बाद मेरी बच्ची सोई है
आँखे सूजी और गायब है हाँसी उसकी सारी बिना गुन्हा के रोई है

धीमी करवा दो पड़ोस के टीवी में चल रहे समाचारो की आवाज
काँप उठेगी फिर से वो सुना अगर फिर किसी ने आज अस्मत खोई है

बड़ी चर्चाओं को सहना है , बड़े दुखो को कहना है अभी फैसला तो दूर है
की कैसे और कब लूटी है अस्मत सिर्फ यही चर्चा हो रही है !!

चंद भेडियों की गलती पर इन्सनियत ने चुप्पी सादी है
अगर शेरो ने खाल पहन ली है डरकी तो शेरनियां भी क्यों सोई है

कौन क्या करेगा यही डर है सबको इसी सोच पर कितनी बेटियां रोई है
अरे कुण्डी ना खड़काओ चुप रहो आज महीनो बाद मेरी बच्ची सोई है !!

-अश्वनी कुमार