Category Archives: Hindi Poems on Issues and Concerns

Hindi Poem on Coronavirus Pandemic-Corona

कोरोना

ये कैसी महामारी है
जो हर देश पर पड़ रही भारी है ।
कैसे इस समस्या का समाधान करें
जब बड़े बड़े देशों ने हार मानी है।
बाहर से हम कितने ही निडर बने रहें
पर सबके दिल मे न जाने कितने डर है पल रहे।
कहीं लेट न जाऊं मैं मृत्युशय्या पर ,
कहीं इस बार मेरे परिवार की तो नही बारी है।
हरा देंगे कोरोना तुझको हम मिलकर
इन शब्दों का संचार सबके मुख से जारी है ।
पर कितनी इन शब्दों में सच्चाई है ??
हालात बद से बद्तर होते जा रहे हैं
अधरों पर दुआ और
आँखों से निकल रहा पानी है।।
मोदी जी इस कहर से बचा लो हमें
अभी तो रचनी हमें नए भारत की कहानी है🙏🙏
-कल्पना सागर

Hindi Poem on Covid-2019 Pandemic-Mahamari Corona

महामारी (कोरोना)

चीन ने किया है ऐसा वार
पूरी दुनिया गई है हार

इसके लक्षण हैं तज बुखार, सिर दर्द और साँस लेने में तकलीफ,
लोग माँग रहे हैं जान की भीख
इससे बचना है तो हाथ बार-बार धोना है
इस घातक बीमारी का नाम ‘कोरोना’ है

‘1720’, ‘1820’ और ‘1920’
आखिर क्या है इस ’20’ का राज?
पहले भी ऐसे ही आ रही थी मौत की आवाज
अब फिर ‘2020’ में जी उठा है शैतान
जिससे सबसे पहले संक्रमित हुआ चीन का ‘वुहान’

चमगादड़, साँप, बिच्छू सबको बना रहे हैं आहार
चीन की क्रूरता से खतरे में है आज पूरा संसार
भगवान ने दिया है सबको जीने का अधिकार
सभी चार पैर वालों पर फिर तुम क्यों करते हो प्रहार?
तुम्हारे स्वाद से आज पूरा विश्व है लाचार
खुदा भी इनकी निर्दयता देखकर कहेगा:
चीन वालों तुम पर है धिक्कार!

आज हर इंसान की खतरे में है जान
महामारी की आड़ में डूब रही देश की शान
लोग सैनिटाइजर और मास्क के कारोबार के घोटाले से बन रहे हैं धनवान
आज लोगों में जरा भी इंसानियत नहीं बची है,
एक दिन पैसा होगा लोगों से बढ़कर, हमें नहीं था ज्ञान,
अपने फायदे के लिए लोगों को कर रहे हैं कुरबान
ये सारा पैसा धरा रह जाएगा एक दिन यहीं
मौत के बाद लोग जहाँ जाते हैं
सबको जाना है एक दिन वहीं

इस आपदा को नियंत्रण में लाने के लिए
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘जनता कर्फ्यू’ का चलाया प्रावधान
और कहा सभी देशवासियों से की रहे सावधान
जो नहीं मानते वे हैं इस बात से अज्ञात
इस ‘वायरस’ को कोई भी भाए बच्चा, बूढ़ा और जवान
जो करे समर्थन देश का, वही है सच्चा इंसान

जिस प्रकार ‘इटली’ में रोजाना जा रही है लोगों की जान
दिन प्रतिदिन ये देश बनता जा रहा है शमशान
अगर ‘भारत’ में नहीं चाहते हो ऐसा हाल
तो घर पर रहकर दो देश का साथ
वरना सोचते रह जाओगे, ये महामारी चलेगी ओर कितने साल?

हर 100 साल में क्यों मौत का खेल खेला जा रहा है?
अपनों के मरने के गम में हर कोई आँसू बहा रहा है
कितना अजीब सा है ये खेल
जो गलती लोगों ने की ही नहीं, उसे रहे हैं झेल
हर 100 साल में महामारियों का क्या है मेल?
जिनको हो रहा है ये वायरस
वे काट रहे हैं बिना अपराध की जेल

अपने ही घर से बाहर निकलने में आज डर रहे हैं कुछ लोग
चीन ने कैसा फैला दिया है ये रोग
जो गलती लोगों ने की ही नहीं
उसकी सजा रहे हैं वे भोग

लोगों में फैल रहा है इस प्रकार कोरोना का डर
हजारों की तादाद में लोग रहे हैं मर

इस जानलेवा वायरस का मिला नहीं अभी कोई तोड़
इसके डर से सुनसान पडे हैं गली और रोड
कभी सोचा भी न था कि, जिंदगी लेगी ऐसा मोड़
कि लोग घरों में रहकर कहेंगे, कोरोना अब तो हमारा पीछा छोड़

हे भगवान! आपसे बस यह विनती है हमारी
पड गई है संकट में आज दुनिया सारी
दुनियाभर में तेजी से फैल रही है ये महामारी
बेगुनाह लोगों पर हो रही है भारी
आप हमें इस आपदा से बचा लो
हम आप पर रहेंगे जीवनभर आभारी!

गलती एक देश की भुगत रहा पूरा संसार
चीन ने किया है ऐसा वार!!
-हिमांशु राणा

Hindi Poem on Alcoholism-May Aur Main

मय और मैं

मेरा नाम अगर शराब होता,
काम से ज़्यादा, बवाल होता,
पीता हर कोई, यूं रोज़-रोज़,
काम उसका, नाम मेरा होता,

होंठ पर लगा कर अगर वो चूमता,
निशान औरों के अधर पर होता,
अगर लगे शहर में भले शराब बंदी,
शराब पे नहीं, ताला मुंह पर होता,

इमारत बन गई है ऊंची ऊंची,
ईमान ख़तम, बची नहीं सूची,
कच्चे मकान में थे सच्चे लोग,
शीशे के मकान, पत्थर के लोग,

शराबियों के बीच गुज़ारी जो रात,
आज दीगर जरायम हो गया मुझसे,
कहा राम, पर सुना कुछ और बात,
राम कह मिलाया गया शराब को मुझसे
-नरसिंह यादव

भावार्थ:

इस कविता में कवि नरसिंह यादव एक शराबी की व्यथा बता रहे हैं। एक आदमी जो सदाचारी था उसको ख़राब संग के कारण भगवान् राम के नाम पर शराब का सेवन कराया गया। कवि कहता है कि शराब को बुरा नहीं कहो, गलती शराबी की है जो बार बार सेवन करता है।

आवश्यक सूचना: शराब पीना सेहत के लिए हानिकारक है|

May Aur Main

Mera naam agar sharab hota,
Kaam se zyada, bawal hota,
Peeta har koi, yu roz roz.
Kaam uska naam mera hota,

Hoth par laga kar agar wo chumta,
Nishan auro ke adhar par hota,
Agar lage shahar mein bhale sharab bandi,
Sharab pe nahi, taala muh par hota,

Imarat ban gayi hai oonchi-oonchi,
Imaan khatam, bachi nahin suchi,
Kacche makaan mein the sacche log,
Sheeshe ke makaan, pathar ke log,

Sharabiyo ke beech guzati jo raat,
Aaj digar jarayam ho gaya mujhse,
Kaha Ram, par suna kuch aur baat,
Ram kah sharab ko milaya gaya mujhse
-Narsingh Yadav

Meaning in English:

The poem describes the story of a man who was lured into drinking alcohol in the name of God. He never wanted to be an alcoholic but a bad company made him one. He says that alcoholics are to be blamed and not alcohol as they become addicted to the substance due to constant use.

Disclaimer: Drinking is injurious to health.

Hindi Poem on Corona Virus – Corona Corona (Covid 2019)

कोरोना कोरोना (कविता का शीर्षक)
कोरोना कोरोना
हाय हाय कोरोना
चारों दिशाओं में है बस इसका
रोना ही रोना
चीन से उपजा है ये
जानलेवा वायरस
देखते ही देखते पुरे विश्व को
कर लिया है डस
इसका नाम करण कोविड २०१९ है हुआ
सब बीमार हो गए इसने जिनको छुआ
नहीं है निकली इसकी कोई दवा या वैक्सीन
इसीलिए परहेज़ करें और रखें पर्सनल हाइजीन
अगर शक हो आपको ज़ुकाम खांसी और बुखार से
तो डरें नहीं आप डॉक्टर द्वारा रोग उपचार से
ऐसा नहीं है कि कोरोना घातक ही होता है
किन्तु बच्चों और बूढ़ों को सुरक्षित रखना अच्छा है
साबुन और पानी से हाथ धोना ज़रूरी है
खांसते और छीकते समय मुँह ढकना ज़रूरी है
रहे खुद भी स्वस्थ और सबको दें सही ज्ञान
झूठी अफवाहों से सदा रहे सावधान
-अनुष्का सूरी (कवि)
Corona Corona (Title of the Poem)
Corona Corona
Haye haye Corona (Oh God, Corona)
Charon dishaon mein hai bas iska (In all parts of the world)
Rona hi rona (There is a hue and cry about Covid 2019 coronavirus)
Cheen se upja hai ye (The Coronavirus has originated in China)
Jaanleva virus (A deadly virus)
Dekhte hi dekhte poorey vishv ko (It has gradually affected the entire world)
Kar liya hai das (same as above)
Iska naam karan Covid-2019 hai hua (The virus has been officially named Covid-2019)
Sab beemar ho gaye isne jinko chua (The people who came in contact with this virus fell sick)
Nahi hai nikli iski koidawa ya vaccine (There is no medicine or vaccine for treating this virus yet)
Isiliye parhez karein aur rakhein personal hygiene (Therefore you are advised to be careful and maintain good hygiene)
Agar shak ho apko zukam khansi aur bukhar se (If you see the symptoms of Coronavirus in you such as cough, fever and breathlessness)
To darein nahi aap doctor dwara rog upchar se (Then do not be scared to see a doctor)
Aisa nahi hai ki Corona ghatak hi hota hai (It is not that every Coronavirus infection is deadly)
Kintu baccho aur budho ko surakshit rakhna accha hai (But it is better to be extra careful about children and elderly population)
Sabun aur pani se hath dhona zaruri hai (It is essential to wash your hands with soap and water)
Khanste aur cheekte samay muh dhakna zaruri hai (It is important to cover your face when you cough or sneeze)
Rahein khud bhi swasth aur sabko dein sahi gyaan (Stay healthy and educate others correctly)
Jhuthi afwaho se sada rahein savdhan (Always stay informed of any rumours and false information)
-Anushka Suri (Poet)

Hindi Poem on Duty of Citizens- Hum-Aap Nagrik Hain

हम-आप नागरिक हैं (कविता का शीर्षक)
आओ अपना संविधानिक फ़र्ज़ निभाते हैं,
कर्तव्यों का हमें नहीं पता, पर हम आम नागरिक हैं ,
हमें भला कौन रोकेगा ?
सरकारे हैं ना चलो उन पर दोष लगाते हैं ।
आओ आज अपना संविधानिक फर्ज निभाते हैं।।
सुनो, पुलिस जो आए तो उसे भी ना छोड़ना ,
क्योंकि हमारा काम है बस सरकारों को दोष देना ,
दिल्ली ही तो है, फिर बस जायगी पर अगर शान्ति रही तो देश मे मानवता ना फैल जायगी।।
पत्थर मे पथरबाज़ी में भला कश्मीर ही क्यों आगे रहे ?
हम हैं ना, चलो किसी की दुकान तो किसी का घर जलाते है ।
चलो आज अपना फ़र्ज़ निभाते हैं,
चलो आज फिर से सरकारों को दोषी ठहराते हैं।।
हममें से कुछ मुसलमान होंगे, कुछ हिन्दू होंगे ,
कुछ पक्ष मे होंगे, कुछ विपशी होंगे,
अरे ये सी ऐ ऐ क्या है, तुम्हें पता है क्या ?
पर चलो बहुत दिन गये शान्ति के, अब ये जो बिंदु मिला है
इसी बहाने कुछ उपद्रव मचाते हैं ,
चलो सरकारों को दोषी ठहराते है,
हम आम नागरिक है, चलो ज़रा अपना फ़र्ज़ निभाते हैं।।
सुना है महमानों को बुलाया जा रहा है देश में,
चलो उनको तो अपने संस्कार दिखाते हैं ।
अभी तो मरने वालों की संख्या बत्तीस हुई है
चलो पचास के पार पहुँचाते हैं ,
किसी का बाप छिने, किसी का सुहाग हमें भला क्या लेना
हम देश प्रेमी है गलत के खिलाफ आवाज़ ही तो उठाते हैं ।
चलो आज अपना फ़र्ज़ निभाते हैं,
हम तो आम नागरिक हैं, हमें कौन रोकेगा,
हम ही तो सरकार बनाते हैं ।
आओ आज उन्ही सरकारों को दोषी ठहराते हैं।।

  • आकांक्षा देशवाल