Punjabi Poem on Friendship in Hindi – Yaara


यारा

मेरे सोह्णेया यारा वे
जान तो वी पियारे दिलदारा वे
मेरे लई पैंदी धुप च छाँ वी तू
मेरे हर गम च सुख दा ना वी तू
मेरी ज़िन्दगी च फुलां दी बहार वी तू
मेरे लई रब दी थां तू
मापया तो बाद दूजा नां तू
मेरे हर रिश्ते दी बुनियाद तू
दिल मेरे दी धड़कन वी तू
जिस्म मेरे दी रूह वी तू
मेरे हर साह विच बसेया प्रीत तू
मेरे सोह्णेया यारा वे
जान तो वी पियारे दिलदारा वे

राहुल कुमार

Yaara

Mere sohnya yaara ve
Jaan to vi piyaare dildaara ve
Mere lye paindi dhoop ch chaa vi tu
Mere har gum ch sukh da naa vi tu
Meri zindgi ch phoolan Di bhaar vi tu
Mere lye rabb they thah tu
Maapya to baad duja naa tu
Mere har rishte di buniyad tu
Dil mere di dhadkan vi tu
Jism mere di rooh vi tu
Mere har saah vich bsya preet tu
Mere sohnya yaara ve
Jaan to vi piyaare dildaara ve

-Rahul Kumar

Hindi Poem on Self-Betterment – Andar Baitha Ravan


अंदर बैठा रावण

जो सालों पहले ही मर गया, उसको हर बार जलाते हो,
मिनटों की शौखों की खातिर पैसा तुम व्यर्थ बहाते हो।
बुराई की पराजय का तुम क्यों ये ढोंग रचाते हो,
जो अंदर बैठा है छिप के, उसको क्यों भूल जाते हो।।

पूछो खुद से!! क्या खुशियाँ मनाने का यह एकमात्र तरीका है?
पूछो खुद से!! वायु मलिन कर खुशियाँ मनाना, क्या यह सुगम सलीका है?
पूछो खुद से!!

न किसि का बुरा करो और न ही कुछ गलत सहन करो,
जो करना है तो अंदर बैठे रावण का तुम दहन करो।।
बुराई पे अच्छाई की जीत के नाम पे, रावण दहन हर बार करोगे,
सच में अच्छाई तब जीतेगी, जब तुम जन जन से प्यार करोगे।।
छल जलन, निंदा कपट को मारो प्यारे,
मझधार में अटकी नईया, लग जाएगी आप किनारे।।

शान्तनु मिश्रा

Hindi Poem on Silence is Golden – Maun Aur Muskan


मौन और मुस्कान

मौन में अनंत शांति समायी है,
मुस्कान उस शांति की परछाई है,
गहरा रिश्ता है मौन का मुस्कान से
मैं सुनाता हूं सुनो ध्यान से,

मौन महल है तो मुस्कान द्वार है,
यहां पहुचने के रास्ते हज़ार हैं,
मौन भाव में स्थित होती है जब दृष्टि
तब मुस्कुराती नज़र आती है सम्पूर्ण सृष्टि

यहां हर कोई विचारों और वाक्यों में उलझा है,
मौन को जाना जिसने बस वही सुलझा है,
मौन कारण है तो मुस्कान प्रभाव है
वास्तव में यही तो हमारा स्वभाव है,

सम्पूर्ण सृष्टि मौन भाव में ही विचरती है
मुस्कुराती है अपना कार्य बखूबी करती है,
मुस्कान मौन से ही दिव्यता पाती है,
तभी तो ये मुख की शोभा बढा पाती है,

जब मन पा जाता है मौन अवस्था
तब समझ में आने लगती है सम्पूर्ण सृष्टि व्यवस्था,
मन मौन होने पर मनुष्य तब अचंभित होता है
मुस्कान बन तब उसमें मौन ही प्रतिबिंबित होता है…

-नवीन कौशिक

Hindi Poem on Income Tax – Aykar


आयकर

देश प्रगति पर लाना है ।
आयकर समय पर चुकाना है।।

कर्तव्य निभाते विशेष कार्याधिकारी ।
भारी सब पे आयकर की छापेमारी ।।

सुनो नहीं है हम बेईमान ।
आयकर जमा कर बढ़ाए मान ।।

कालाधन ना बचने पाए ।
कहीं मुजरिम ना हम बन जाए ।।

कर्तव्य प्रधान से बढ़े समाज ।
जिम्मेदारी से करे कामकाज ।।

नहीं लुटेरी है सरकार ।
आयकर; विकास की दरकार।।

रीत रितिका दांगी
मध्यप्रदेश

Hindi Poem on Grief -Pattey


पत्ते

टूट के बिखरी मैं भी हूँ
जैसे बिखरते है पत्ते शाखों से टूट कर।
रोज़ ज़माना मसल कर चला जाता है उन पत्तों को,
उन हज़ार पत्तों में एक पत्ता में भी तो हूँ।

इंतज़ार रहता है उस हवा के झोंके का
जो,कहीं दूर ले चले मुझे उसके साथ
अब मुझे यह रुसवाई चुभने लगी है।

-स्रेष्ठा

Tut ke bikhri mein bhi hoon
Jaise bikhar te hain patte sakho se tut kar.
Roz zamana masalkar chala jata hain un patto ko,
Un hazar patto mein ek patta mein bhi to hu

Intezar raheta hain us hawa ke jhooke ka
Jo, kahi dur le chale mujhe uske sath
Ab mujhe yeh ruswaa-e chubhne lagi hain.

Sreshtha

Amazing Hindi Poetry Collection

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