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Hindi Poem on Good Habits – अच्छा है जी अच्छा है

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सुबह सवेरे जल्दी उठना, अपने बड़ो को नमन करना,
अच्छा है जी अच्छा है।
नित्य कर्म में ना अलसाना, कुल्ला- मंजन ढंग से करना,
अच्छा है जी अच्छा है।
खूब चबा कर भोजन करना, दिन भर खूब पानी पीना ,
अच्छा है जी अच्छा है।
समय पर पढ़ना, समय पर लिखना, खेल- कूद भी, समय पर करना,
अच्छा है जी अच्छा है।
स्वस्थ रहेगा, जब तुम्हारा बचपन, खुशहाल होगा, तब ही सारा जीवन।
अच्छा है जी अच्छा है। 

-सुनीता बहल

Acha hai ji acha hai
Shubh savere jaldi uthana apne bado ko naman krna
Acha hai ji acha hai
Neetay karam mein na alsana, kulla manjan dhang se karna
Acha hai ji acha hai
Khub chaba ke bhojan karna din bhar kub pani pina
Acha hai ji acha hai
Samay par padhna samay par likhna khel kud bhi samay par karna
Acha hai ji acha hai
Swasth rahega jab tumhara bachpan khushaal hoga tab hi sara jeevan
Acha hai ji acha hai 

-Sunita bahal

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Hindi Poem on Farmer – एक किसान

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दो दिनों से कुछ खाए बिना , वो भूखा सोया था ।।
फसलो को अपनी देख कर , वो खूब रोया था ।।१

बरसात गुजर तो गई , पर कुए भी भर न पाई ।।
कर्ज की पहली ही किस्त थी ,
जो दो सालो बढ़ती आई ।।२

घर था गिरवी रखा उसने , पर ब्याज इतना बढ़ गया था ।।
छोड़ कर चल दिए थे अपने , वो अकेला पड़ गया था ।।३

घर नीलाम होने की डर से , वो बहुत डर गया था ।।
जिन्दा रहने की चाह थी उसकि,पर वो टूट कर बिखर गया था ।।४

रहमत की भीख मांगी थी उसने,
पर वक्त बहुत हो चला था ।।
दो दीन बीद घर नीलाम होना था, वो एक दीन पहले छोड़ गया था ।।५

पत्नी माइके से लोटी नहीं थी , बेटे को साथ लिए थी वो ।।
मुश्किल वक्त में साथ न देकर , पति को छोड़े हुए थी वो ।।६

वो अकेला गम का बोझ लिए था ,
पर अब तो कंधे भी टूट गए थे ।।
रब रूठा था जायज था , पर तब तो अपने रूठ गए थे ।।७

खाकर जहर भी जब न मोत आई , वो फासीं लगाकर लटक गया ।।
दूसरे दीन अख़बार ने छपा ,
एक और किसान सटक गया ।।८

पर तब इंसानियत शर्मसार हो जाती हे, जब हुकूमत ये कहती हे ।।
पारिवारिक कलह के चलते , ऐसी घटनाए होती रहती हे ।।९

पर कर्ज माफ़ फिर भी न होता ,
घर फिर भी नीलाम होता हे ।।
ये किसानो का नसीब भी इतना ,
कयूँ बेहरहम होता हे ।।१०

~ अंशुमान शर्मा ‘सिद्धप’

Hindi Poem on Death-अन्तिम विदाई

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आज ले ली है विदाई किसी ने अपने परिवार और जहान से
पूरी हुकूमत थी उनकी जग में जीना  आता था उन्हें शान से
आज ले ली है विदाई किसी ने अपने परिवार और जहान से।
बस यादों में रह गया बसेरा बड़ी दूर हो गया घर अब तेरा
फिर नहीं होगा मेरे घर तेरा फेरा सपनों में याद आएगा
हमको बस एक तेरा चहरा बस यादों में रह गया बसेरा
बड़ी दूर हो गया घर अब तेरा। दिल का आँगन कर गये सुन्ना
तुम तो थे बरगद का पौधा हम सब तो थे इसका तना
शांति दे आत्मा को तुम्हारी प्रर्थाना करेगें उस भगवान से
आज ले ली है विदाई किसी ने अपने परिवार और जहान से।

– गरीना बिश्नोई

Aaj le li hai  Vidai kisi ne apne  pariwaar aur jhaan se
Puri Hukumat thi unki jung mein jina aata tha unhe shaan se
Aaj le li vidai kisi ne apne pariwar se aur jhaan se
Bas yaado mein reh gaya basera badi dur ho gya ab ghar tera
Fir nai hoga mere ghar fera sapno mein yaad aayega
Humko bas ek tera chehara bas yaadon mein reh gaya basera
Badi dur ho gya ghr tera dil ka aagain kar gye suna
Tum to they bargad ka podha hum sab to they eska tana
Shanti de aatma ko tumhari prathana krege us bhagwaan se
Aaj le li hai vidai kisi ne apne pariwaar aur jhaan se

-Garina Bishnoi

Hindi Poem on Rape- आदम खोर दरिन्दें

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कब खूनी खेल खत्म होगा,
इन आदम खोर दरिन्दों का,
बचपन छीन न जाए इनका,
नन्हें इन परिन्दों का,
अगला शिकार कौन हो इनका,
पता नहीं इन छरिन्दों का,
हँसनें से भी डर लगता है,
सहम जाती हूँ ये देख कर,
कब शिकार होना पड़े,
इन आदम खोर दरिन्दों का,
कब खूनी खेल खत्म होगा,
इन आदम खोर दरिन्दों का।

गरीना बिश्नोई

Kab khuni khel khtam hoga
En aadam khor darindo ka
Bachpan chin na jaye enka
Nanhe en parindo ka
Agla shikar kon ho inka
Pta nahi en charchindo ka
Hasne se bhi dar lagta hai
Sham jati hoon ye dekh kar
Kab shikar hona pade
En aadamkhor darindo ka
Kab khuni khel khtam hoga
En aadam khor darindo ka

-Garina Bishnoi

Hindi Poem for Women – नारी शक्ति

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नारी सिर्फ उपभोग की वस्तु है
ऐसे विचार कभी क़बूल मत करना
नारी को अबला समझने की  कभी भूल मत करना
नारी अम्बर है कोई शीशे की दिवार नहीं
नारी खुद में शक्ति है किसी की मोहताज़ नहीं
संघर्षो से टकराना उसको भी आता है
हर मुश्क़िल  से गुजर जाना उसको भी आता है
प्यार से देखोगें तो बहार नज़र आयेगी
नफरत से तोड़ोगे दीवार नज़र आयेगी

– साहिन मनसोरी

Nari sirf upbhog ki vastu hai
Aise vichar kabhi qabol mt karna
Nari ko abla samajhane ki kabhi bhul mat karna
Nari ambar hai koi shise ki divar nahi
Nari khud mein Shakti Hai kisi ki mauhtaaz nahi
Sangharshon se takrana ushko bhi aata Hai
Har mushkil se gujar Jana ushko bhi aata hai
Pyaar se dekhoge to bahaar nazar aayegi
Nafrat se todoge to deewar nazar aayegi

-Sahin mansory