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महफ़िल सजा ली यारों की, तो हुई बदनामी
बगिया खिला ली बहारों की, तो हुई बदनामी
यह कैसा समाज, जो बदनाम करता फिरता है?
मदद कर दी बेसहारों की, तो हुई बदनामी।

किसी पे दिल अगर ये मर लिया, तो हुई बदनामी
बाँहों में किसी को भर लिया, तो हुई बदनामी।
बदनामी के दौर में भला कौन है बदनाम नही?
कभी प्यार किसी से कर लिया, तो हुई बदनामी

अगर आजदी से घूम लिया, तो हुई बदनामी
महफ़िल में कभी झूम लिया, तो हुई बदनामी
प्रेम को बदनाम कर दिया जालिमो ने इतना
माथा जो उसका चूम लिया, तो हुई बदनामी।

रोकूँ कैसे यारों आज होने से बदनामी?
स्याही के कुछ दाग भी धोने से बदनामी
जिसको पाकर बदनाम ही बदनाम हुआ हूँ
छोड़ दूँ अगर साथ उसे खोने से बदनामी।

जब ज्यादा हो पैसा, तो होती है बदनामी
चाहें गरीब हो कैसा, तो होती है बदनामी
जब बदनामी का दौर है, फिर मैं कैसे बचूँ?
हो इन्शान मेरे जैसा, तो होती है बदनामी।

अक्सर समाज में हर जगह मिलती है बदनामी
बहारों में भी फूल की जगह खिलती है बदनामी
कोई बताये वो जगह, जहाँ होतीं ना बदनामी
जिधर देखो हर जुबान से निकलती है बदनामी।

कांटे नही उससे बढ़कर है सुई बदनामी
हवा से हल्की उड़ने वाली रुई बदनामी
जितना खुद को रोका बदनाम होने से
उतनी ज्यादा और अक्सर हुई बदनामी।

– राहुल रेड

Mehfil sja li yaron ki, to hue badnami
Bagiya khila libaharon ki to hue badnam
Yeh kesa smj hai jo badnaam krta firta hai
Madd kar di besharon ki to hue badnam

Kisi pe dil ye mar liya to hue badnami
Bahon me kisi ko bhr liya to hue badnami
Badnami k dor me bha kon hai bad man nahi
Kabhi pyar kisi se kar liya to hue badnami

Agar ajadi se ghoom liya to hue badnami
Mehfil me kabhi jhoom liya to hue badnami
Prem ko badnam kar diya jalimo ne etna
Matha jo uska chum liya to hue badnami

Roku kese yaron aaj hone se badnami
Syahi k kuch daag dhone se badnami
Jisko pa kar badnaam hi badnaam hua hoon
Chor du aggr sath use khone se badnami

Jab jyada ho pesa to hoti hai badnami
Cahe garib ho kesa to hoti hai badnami
Jab badnami ka daur hai fir main kese bachu
Ho insaan mere jesa to hoti hai badnami

Aksar smaj me har jagh milti hai badnami
Baharon me bhi ful ki jagh khilti hai badnami
Koi btaye wo jgh jha hoti na badnami
Jidhr dekho har jubann se niklti hai badnami

Kate nahi usse badkar hai sui badnami
Hwa se halki udne wali rue badnami
Jitna khud ko roka badnam hone se
Utni jyada aur aksr hue badnami

– Rahul Red

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