Category Archives: Abstract Poems

Hindi Poem on Brave Soldiers-हम सैनिक हैं बड़े हठीले

हम सैनिक हैं बड़े हठीले,
हम कुछ भी कर जायेंगे।
अरि सुनकर पद ध्वनियों को,
वो दिल ही दिल में दहशत खायेंगे।
हम ऐसे वीर मतवाले हैं,
जैसे लड़ सको हम लड़ जायेंगे।
हम नहीं ठहरते पलभर भी,
बैरी का सीना चीर के आयेंगे।।
वीरगति चाहें भले मिले,
पर दुश्मन का अस्तित्त्व मिटायेंगे।।
-सर्वेश कुमार मारुत
फरीदपुर बरेली ( उत्तर प्रदेश)

Hindi Poem on Sleeplessness: Neend

नींद भी इतनी खफा है हमसे अब आयी तो सुबह न होगी,

कहती है जिंदगी को ज़हर देदो 
दवाओं में असर रहा नही,
खुद को अंधेरे में कैद कर लो 
अब कोई सवेरा नया नही ,

थक गया हूँ , थकान ऐसी की थकने की वजह मालूम नही,
आंखे कहती है नींद लेलो, 
मगर नींद कुछ खफा है हमसे, खफा इतनी की अब आयी तो सुबह न होगी ।

-आयुष बैद

Meri bhi apni shaili hai-I have my own poetry Genre

मेरी भी अपनी शैली है,
काव्यमय अद्भुत पहेली है,
अलंकारों से पूर्ण सुशोभित,
भाव रसों से बनी अलबेली है।
मेरी भी अपनी शैली है,
काव्यमय अद्भुत पहेली है।
आम समझ से परे है किंतु,
बात सरल सुरीली है,
आड़े- तिरछे समय में भी,
बात न टेढ़ी-मेढ़ी है,
मेरी भी अपनी शैली है,
काव्यमय अद्भुत पहेली है।
भाव सरस पर आम नहीं,
हथियारों का यहां कोई काम नहीं,
पंक्तियों की चोट अक्सर होती,
तलवारों से भी पैनी है,
मेरी भी अपनी शैली है,
काव्यमय अद्भुत पहेली है।

-मयंक गुप्ता

Motivational Poem-Abhi Shuruwat Hai

जब हिम्मत टूटने लगे समझना अभी शुरुआत है !!

मिट जाएगा अंधेरा होगा नया सवेरा ज्यादा नहीं बस दो-चार पल की रात है.
जब हिम्मत टूटने लगे समझना अभी शुरुआत है !!

ऐसे नहीं मिलती मंज़िलें रास्ते चुन लो सही.
चलते रहो बनकर पथिक काँटों की परवाह कर नहीं.

पैरों में जब छाले पड़ेंगे दर्द छोटी बात है.
जब हिम्मत टूटने लगे तो समझना कि अभी शुरुआत है!! 

बर्फ से पाला पड़ेगा रुकने ना देना कदम .
सूर्य भी पिघलाएगा तब पड़ ना जाना तुम नरम .

अरमान बहने दो ना अब इम्तिहान की बरसात है .
जब हिम्मत टूटने लगे तो समझना कि अभी शुरुआत है !! 

सफर आधा कर लिया हिम्मत लगी जब टूटने .
कमज़ोर तुझको देख सब इज्जत लगेंगे लूटने .
बन रहा कलंक क्यों ? दुष्टों की यहां बारात है.

जब हिम्मत टूटने लगे तो समझना अभी शुरुआत है !! 

जितनी भी ठोकर खा रहा तू गिर रहा उठ कर के चल. 
हृदय में पत्थर बांध ले हर बार गिर गिर कर संभल.
मत हार हिम्मत होगी कल मंज़िल से मुलाकात है.

जब हिम्मत टूटने लगे तो समझना कि अभी शुरुआत है !! 

ये रास्ते होंगे कठिन मज़बूत तुमको कर रहे.

कि लड़ सको यमराज से तुम व्यर्थ में क्यों डर रहे ? 
टिकता समर में वीर वो हर शस्त्र जिसको ज्ञात है .

जब हिम्मत टूटने लगे तो समझना कि – अभी शुरुआत है !! 

ऐसे बन जाओ तुम हर खतरों से जो लड़ सको.

अर्जुन सा बन कर लक्ष्य के हर दुर्ग पर तुम चढ़ सको.

कहता है आर्यन सिंह इम्तिहान के बाद नव प्रभात है .

जब हम मत टूटने लगे तो समझना अभी शुरुआत है !! 

क्रांतिकवि आर्यन सिंह यादव

Letter to Mother by Soldier-Ek Khat (Sainik Ka) Maa Ke Naam

*एक खत ( सैनिक का) माँ के नाम*
माफ करना माँ मै तुझे अलविदा ना कह सका,
तेरे आँचल में पल दो पल न रह सका
रोज याद तेरी आती थी,
छू कर मेरी रूह को गद गद कर जाती थी,

पर पता है माँ ,
इस मिट्टी की नरमी तेरे होने का हर पल मुझे आभास कराती थी
प्यार से चुम कर तेरी ही तरह सहलाती थी
रोज रात बाहे फैलाती थी
कण कण अपने छनकाकर लोरी सुनाती थी
फिर क्या!! रोज़ रात तुझसे मुलाकात हो जाती थी
जब सपनो में तू मेरे आकर मुस्काती थी
पर माँ,
तेरी मेरी मुलाकात का समा सपनो तक ही सीमित रह गया
तेरी रूह का चिराग , खुद अँधेरे में बह गया।

दहलीज पर बैठ कर ,तू मेरी राह तकती रही
आढ़ में यादो की बैठ ,तू बिलखती रही

पर लुटा कर अपना सब कुछ इस वतन पर, मैं तुझे कुछ ना दे सका
माफ करना माँ मैं तुझे अलविदा भी न कह सका ।।
– अभिलाषा सिंघल