आज के कलियुग में भक्ति देवी की पुनः स्थापना करने वाले संत शिरोमणि जगद्गुरूत्तम श्री कृपालु जी महाराज ने हिंदी साहित्य में अनेक रचनायें की हैं। उन्ही में से एक है – राधा गोविन्द गीत। इस महाकाव्य ग्रन्थ को दो भागों में प्रकाशित किया गया है जिसमें मानव देह का महत्त्व, भक्ति, ज्ञान, योग आदि विषयों पर जगद्गुरूत्तम श्री कृपालु जी महाराज द्वारा लिखे गए १११११ दोहे हैं। आइये हम भी इस ग्रन्थ में लिखे गए एक दोहे का अध्ययन करें:
आयु जल बुलबुला गोविंद राधे।
जाने कब फूट जाये सबको बता दे ॥
जगद्गुरूत्तम श्री कृपालु जी महाराज, राधा गोविन्द गीत (९५६)
इस दोहे में जगद्गुरूत्तम श्री कृपालु जी महाराज बता रहे हैं कि हमारा मानव देह पानी के एक बुलबुले के सामान क्षणभंगुर है जो किसी भी समय फूट सकता है यानि हमारी कभी भी मृत्यु हो सकती है। अतः हमको अपने इस सुर दुर्लभ देह पर विचार करते हुए श्रेष्ठ कर्म करने चाहिए।
कैसे पढ़ें राधा गोविन्द गीत काव्य?
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