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Hindi Poem on Water-पानी है धरती की शान


पानी है धरती की शान, पानी बचत हमारा काम
जीवन का ऐसा कोई काज नही,
बिना नीर हो उसका नाम अम्बु है अम्बर तक फैला,
सजते सागर नदी तालाब गीता और कुरान कहे है,
बिन जल बजे न कोई राग धरा में जल का सीमित भंडार,
जल सरंक्षण है हमारी जान बिन जल के समस्त चराचर,
ये दुनिया हो जाती शमशान जल से ही बनता है खून,
बिन जल के न होता शाम पानी है धरती की शान,
पानी बचत हमारा काम बिन पानी सब सून है,
खुद रहीम ने कह डाला जल से ही होती हरियाली,
चले झूम के हस्ती मतवाला फसलें भी चमकती सलिल से,
बसती इसमे सबकी जान पंछी भी कोकिल है मारे,
मछली की है जल में प्रान कोई पेय पीने को तरसे,
किसी की रहती जल में प्रान न करेंगे जल को जाया,
इसकी महत्ता का हो गया है ज्ञान जिस दिन सूखा वारि वसुधा से,
उस दिन आये संकट में प्राण जल से चले हैं सारे उद्योग,
जल से ही होती हमारी आन व्यर्थ करो न जल को तुम,
करो जरूरी अपना काम पानी है धरती की शान,
पानी बचत हमारा काम

-प्रदीप कुमार पटेल

Pani hai dharti ki shaan pani bachat hamara kaam
Jeevan ka koi esa kaaz nahi
Bina neer ho uska naam ambbu hai ambar tak feila
Sajte sagar nadi talaab geeta aur kuran  kahe hai
Bin bin baje na koi raag dhara me jal ka simit bhandaar
Jal saraksan hai hamari jaan bin jal ke samast charachar
Ye duniya ho jati hai shamshaan jal se banta hai khun
Bbina jal ke na hota sham pani hai dharti ki shaan
Pani bachat hamara kaam bin pani sab sun hai
Khud rahim ne kah dala jal se hi hoti haryali
Chale jhoom ke hasti matwala fasle bhi chamkti salil se
Basti esme sabki jaan panchi bhi kokil hai mare ,
Machli ki hai jal praan koi pay pine ko tarse
Kisi ki rahti jal me praan na kroge jal ko jaya
Eski mahata ko ho gya hai gyaan jis din sukha vaari vasuda se
Us din aaye sankat me pran jal se chale hai sare udhog,
Jal se hi hoti hai hamari aan vyarth karo na jal ko tum
Karo jaruri apna kam pani hai dharti ki shaan
Pani bachat hamara kaam

-Pradeep Kumar Patel

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Hindi Poem on Water- मैं पानी की बूँद हूँ छोटी


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मैं पानी की बूँद हूँ छोटी,
मैं तेरी प्यास बुझाऊँ।
पी लेगा यदि तू मुझको ,
मैं तुझको तृप्त कराऊँ।
मैं छोटी सी बूँद हूँ,
फ़िर क्यों न पहचाने?
तू जाने न सही मग़र,
किस्मत मेरी ऊपर वाला जाने।
मैं पानी की बूँद हूँ छोटी,
फ़िर क्यों खोटी मुझको माने?
भटकता फ़िर रहा है तू,
और क्यों अनजान है तू?
तेरी महिमा मैं तो समझूँ न,
जाने तो ऊपर वाला जाने।
मैं पानी की तुच्छ बूँद हूँ,
फ़िर मेरी महत्ता क्यों न जाने?
ज़ीवन रूपी इस पथ पर ,
तुझे अकेले चलना है।
मैं भी चलूँ तेरे साथ -साथ,
और मुझे क्या करना है?
तू पी अपनी प्यास बुझा,
हमें ग़म नहीं है कुछ भी।
काम ही मेरा और क्या है ?,
केवल मुझे सिमट कर चलना है।
अस्तित्व ही यह मेरा है,
मुझे तुझमें रह जाना है।
मैं पानी की बूँद हूँ छोटी,
फ़िर हालातों को क्यों न तुम पहचानो?
तेरे सहार मुझसे है,
और मेरा सहारा तुझसे।
तू तो मुझ पर आश्रित है,
और सब मेरे दीवाने।
तू मर जाएगा मेरे बिन ,
फ़िर क्यों न मुझको पहचाने?
मैं पानी की बूँद हूँ छोटी,
फ़िर क्यों तुम व्यर्थ बितराओ?
बूँद -बूँद से घड़ा भरा है,
क्यों तुम ऐसा न कर पाओ?
यदि रखोगे सुरक्षित तुम मुझको,
मैं तो सागर बन जाऊँ।
अग़र करोगे न तुम ऐसा,
तो मैं तुच्छ बूँद भी न रह पाऊँ।
मैं पानी की बूँद हूँ छोटी,
मैं तेरी प्यास बुझाऊँ।
-सर्वेश कुमार मारुत

Main pani ki boond hoon choti
Main teri pyas bhujau
Pi lega yadi tu mujko
Main tujko trapat kraaun
Main choti si boond hoon
Fir kyon na phuchane
Tu jane na shi magar
Kismat meri upr wala jane
Main pani ki boond hoon choti
Fir kyon khoti mujko mane
Bhatkta fir rha hai tu
Aur kyon anjaan hai tu
Teri mahima main to smjhu na
Jane to upr wala jana
Main pani ki tuchh boond hoon
Fir meri mhanta kyon na jane
Jivan rupi es path par
Tuje akele chlna hai
Main bhi chalu tere sath sath
Aur muje kya karna hai
Tu pi apni pyas bhujha
Hme gam nai hai kuch bhi
Kaam hi mera aur kya hai
Kewal mujse simat kr chalna
Aastitav hi mera hai
Muje tujh me rhna hai
Main pani ki boond hu choti
Fir halaton ko kyon n tum phuchano
Tere shara h mujse
Mera shara h tujhse
To to mujh pr aarshit h
Aur sab mere diwane
Tu mar jayega mere bin
Fir kyon na mujko phuchane
Main ki boond hu choti
Fir kyon tum vyarth bitaro
Boond boond se ghda bhra hai
Kyon tum esa na kr pao
Yadi rkho ge surashit tum mujhko
Main to sagar ban jau
Agr kroge na tum esa
To main tuchh boond bhi na rh pau
Main pani ki boond hu choti
Main teri pyas bujhau

– Servesh Kumar Marut

Hindi Poem on Water – जल पर कविता


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जल ही है जीवन
जल ही है कारण
जल में ही पृथ्वी समाई
जल में ही जीवन की सच्चाई
जल के बिन मीन का ना जीवन
जल के बिन प्यासा जल उपवन
जल से ही होती है खेती खलियारी
जल से ही ही बनी है देह हमारी
जल ही है जो बरसता बन सावन
जल ही है जो देता है बंजर को जीवन
जल ही है पावन
जल ही है मंगल
जल ही है जन धन
जल ही है जन धन

– अनुष्का सूरी