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Arnab Goswami

नाम है मिस्टर अर्नब गोस्वामी
सबको ये याद दिला दें नानी
पहले थे ये टाइम्स नाउ पर
अब दीखते रिपब्लिक टीवी पर
शोर मचा मचा कर इन्होंने
सही को जनता तक पहुँचाया
केवल रिपोर्ट नहीं करते यह
पड़ जाते हैं खबर के पीछे
चाहे इनको कोई डराए
या इनको कितना धमकाए
ये बने हैं सख्त लोहे के
ये नहीं हटते काम से पीछे
अंग्रेजी इनकी माशा अल्लाह
हिंदी भी थोड़ी बोल लेते हैं
देश प्रेम है दिल के भीतर
कभी कभी उड़ेल देते हैं
कर्म ही पूजा है बस इनकी
सच की सीख ये भी देते हैं
ऐसे प्रशंसनीय पत्रकार की
हम सब वंदना करते हैं
-अनुष्का सूरी

Context: This Hindi poem is composed in honor of famous television anchor and journalist Arnab Goswami. He currently leads Republic TV, his own venture. He was earlier working with Times Now as the channel’s editor in chief.

I have written this poem as his ardent fan. I appreciate the way with which he handles each debate on television. I wish to thank you Mr. Arnab Goswami for the commendable job you have been doing. Hats off from a common man 🙂

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