Hindi Poem on an Old Lady Rag-picker: Pagal Budhiya


पागल बुढिया 

बालों के झोपें से क्या वो परेशान नहीं होती,
सड़क के किनारें रोज चलते कचरा बीनते,
नजर पड़ती है मुझ जैसे हजारों की उस पर,
क्या किसी की नजरें उस पर तंग परेशान नहीं होती,
क्या बात है आखिर उन बूढी आंखों में,
एक ना सिकन है चेहरे पर,
ताज्जुब उसे कभी यूं भटकते थकान नहीं होती,
कैसे निष्ठुर पीढी बना रहे है साहेब,
उम्र गुजारी जिसने हमारा आज लिखने को,
फुटपाथ पर उसके नंगे पैरों में जान नहीं होती,
रोज उसी सडक के किनारें हतप्रभ हो जाती हूं,
आखिर उसके हौसले के सामने खामोश हो जाती हूं,
हम बदल गये हैं, हमारी रफ्तारें तेज हो गयी हैं,
बडी खुदमिजाज है, कहती हाथ फैलाये जिदंगी पार नहीं होती,
ये लो कोई कहता कमसिन बुढिया, कोई कचरे बाली बुढिया,
हम तथाकथित शिक्षित पीढी की अम्मा कहने की बात नहीं होती,
गुजर कर कल को ये हालात कमतर नहीं होगें,
आज वो कल कोई और, कोई समझे तो ये हालात ना होती,
बालों के झोपें से क्या वो परेशान नहीं होती,
काश! उसके सवालों का मैं कोई जवाब होती!!!

डाॅ. अवन्तिका शेखावत

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40 thoughts on “Hindi Poem on an Old Lady Rag-picker: Pagal Budhiya”

  1. अति सुंदर रचनाअवंतिका👌👌👌
    अदम्य काव्यात्मक क्षमता के कीर्तिमान को नमन 🙏🙏🙏
    बहुत ही खूबसूरती के साथ समाज की सच्चाई को काव्यात्मक शब्दों में पिरोया है .⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐

    Liked by 2 people

  2. My hindi literature class batchmate dr.avantika………ur 3rd degree mind out of class results these type of poems……..great…..& best anuska suri ji for great site

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  3. Hold on tight guys, A great poetess is on her way 🙂 😉

    जब चलना शुरू करते हैं
    तो दिक्कतें आती ही हैं,
    फिर धीरे धीरे मंजिल नजर आने लगती है !
    तुम ही रुक जाओ
    तो बात अलग है,
    वरना मंजिल तो वहीं रहती है !

    So just keep on playing with words the way u play. 😀😀

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  4. kavitri ki kavita ne ktre se bikhre shabdon ko bunkar jo jaal buna
    uski jhanak ki jhankar se bikharti tarangon ko sunkar ek aagaj hua…
    super poem@ avantika

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  5. khoobsurat baisarajj…..tere shabdo ko padhkar hmare khud ke shabd gum ho jate h khi… keep it up dear…. god bless you 😊😊

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  6. It’s my pleasure to read this … As it’s not just an epic for me,, it’s living snap before my eyes.. Created a magnificent demonstration of the thoughts and high tech level of spiritual thinking…

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  7. बेहतर से बेहतर कि तलाश करो
    मिल जाये नदी तो समंदर कि तलाश करो
    टूट जाता है शीशा पत्थर कि चोट से
    टूट जाये पत्थर ऐसा शीशा तलाश करो ।
    अतिसुंदर

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