Category Archives: Abstract Poems

Hindi Poem for Indian Music -संगीत के सात स्वर

music-278795__340.jpg

आओ मिलकर सीखें आज
संगीत के सात स्वर सरताज
पहला स्वर है सा
इस से शुरू होता है साज़
दूसरा स्वर है रे
इस से बढ़ते हैं आगे आज
तीसरा स्वर है ग
इस से होता है गाना आगाज़
चौथा स्वर है म
इस से बढ़ता है आगे साज़
पांचवा स्वर है प
इस से आगे ऊंचा रियाज़
छठा स्वर है ध
इसे गायें बेहतर आज
सातवा स्वर है नि
इस पर खत्म हुआ स्वरों का राज़

-अनुष्का सूरी

Patriotic Hindi Poem- भारत

indian_art-wallpaper-1366x768

है धरम भूमि ये भारत की
जहाँ वीर जवान सर झुकाते हैं
कितना खून पसीना बहाकर
आज हम आज़ादी का दिन  मनाते हैं
जिनके माथे जनम भूमि का तिलक को
वो वीर भारत माता की शान बन जाते हैं
जिसने दुश्मनों को मार गिराया
आज उस वीर को भारत ने सलाम किया
जिस भारत ने दिया हमें जनम
जहाँ से अपनी पहचान बनी
आज उसी  संविधान को
हम बार बार नमन  करते हैं
पूरे देश में आज हम
गणतंत्र दिवस मनाते हैं
जय हिन्द
जय भारत
जय जवान
जय किसान
– संगीता श्रीवास्तव

Hindi Motivational Poem on Life- नयी राह

life_on_a_stump-wallpaper-1366x768

आज है नयी राह
एक नयी चाह
जीवन को जीने की
दुःख को सीने की
फूलों की खुशबू
कोयल की कु कु
बारिश का पानी
संतों की वाणी
आज सब है सुन्दर
आज सब है बेहतर
क्योंकि दिल में चाहत
करे अब दस्तक
जी लो ये जीवन
जी लो ये जीवन
– अनुष्का सूरी

Metropolitan Zindagi-Hindi Poem on Busy City Life

asia-2181888_960_720

मेट्रोपॉलिटन ज़िन्दगी

दरवाज़े की हुई दस्तक को दरकिनार करना शहरियों की आदत सी हो गयी है
अक्सर किस्मत भी घंटी मार के लौट जाती है परेशान होकर
और कभी खुदा मिलने आया तो उसे भी वापिस जाना पड़ा वक़्त खोकर

सुबह और शाम का मंज़र एक सा लगता है
बहार किसी के होने या न होने से फरक भी क्या पड़ता है
वो क्यों जी रहे हैं दरबों में बंद कबूतरों की तरह
क्या पंख उनके भूल गए हैं उड़ने की कला

दूसरों के काम आने को वो सौदा गलत मान गए
रब ने बनाई दुनिया को “बकवास” और उसके बन्दे को “बेगाना” बता गए
बड़े दिन बाद बहार देखी लेकिन बिना दुआ सलाम के ही फिर मुंह बनाके अंदर चले गए
और लुत्फ़ उठा न सके क्योंकि
दरवाज़े की हुई दस्तक को दरकिनार करना शहरियों की आदत सी हो गयी है

-निवेता

Hindi Poem on Life -Zindagi Tere Chehre Hazaar

 

still-life-851328_960_720.jpgए ज़िन्दगी तेरे चेहरे हज़ार
हंसाएं कभी तो कभी रुलाये ज़ार ज़ार
समझना तुझे आसान नहीं,
कहीं होती है रुक्सत,
तो कहीं लाती है बहार
दिखाती है कभी वीरानियों के आसार,
तूफानों से भी कभी करती है पार
दे देती है कभी अश्क़ बेशुमार,
लूटती है कभी प्यार ही प्यार
कभी रह जाती हैं हसरते कई,
कहाँ आता है फिर ज़िन्दगी में खुमार.
चलाते रहते हैं कश्ती,
की उतरेंगे पार
ले जाती है कहीं और
हमें उमंगों की धार.
हो जाता है खड़ा कभी बेडा मंझधार,
और खोलने को नहीं मिलता पटवार.
ए ज़िन्दगी तेरे चेहरे हज़ार
बीते पलों पर न था इख़्तियार,
आने वाले पलों का रहता इंतज़ार .
बीत जाता है जीवन, हो जैसी बहार,
नहीं आता है कभी जीवन में करार.
रहे कभी तमन्नाओं से दिल गुलज़ार,
वह खिलाये फूल फिर बेशुमार.
यह चाहतों राहतों का है बाजार,
फिर भी चैन नहीं होता शुमार.
बहारों का हर पल रहता है इंतज़ार,
पलों ही पलों में खो जाता है संसार
ए ज़िन्दगी तेरे चेहरे
कभी हंसाएं तो कभी रुलाये ज़ार ज़ार

-किरण गुलाटी