Category Archives: Abstract Poems

Hindi Poem on Time-अभी बाकी है 


रेत का हाथों से फिसलने में वक़्त अभी बाकी है Time
एक लहर गुज़री है दूसरी का लौट के आना अभी बाकी है
कल जो गुज़रा था उसका कल लौट के आना अभी बाकी है
बहुत दिन गुज़ारे हैं अश्क बहा कर फिर से मुस्कुराना अभी बाकी है
गलती ना हो जाये बस यही सोच डरता रहा गलती करके पछताना अभी बाकी है
रात थी लम्बी तो लगा अंधेरे का है राज, सुबह का फिर नयी रोशनी लेकर लौट आना अभी बाकी है

Hindi Poem on Language- मैं भाषा हूँ


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सबको जोड़ती हूँ एक दूसरे से
मैं वही भाषा हूँ
जिसके मन में जो बात हो
वो कहता है लेकर मेरे शब्दों का सहारा
कोई रचता है काव्य कोई साहित्य
और कोई लगा देता है नारा
हाँ मैं वही भाषा हूँ

Hindi Poem on Money – मैं हूँ धन


काग़ज़ का एक छोटा सा टुकड़ा हूँ मैं  Money
पर दुनिया पर राज करता हूँ
कभी किसी की मुठ्ठी में
कभी किसी की जेब में मैं बसता हूँ
कभी मंदिर में चढ़ाया जाता
कभी बैंक में मैं जमा हो जाता
कभी सेठ की तिजोरी मैं भरता
कभी गरीब की रोटी का इंतज़ाम हूँ करता
हाँ सही सोचा तूने ओ मन
मैं हूँ वही – धन

-अनुष्का सूरी