माटी से ही जन्म हुआ है माटी में ही मिल जाना है धरती से ही जीवन अपना धरती पर ही सजे सब सपना सब जीव जन्तु धरती पर रहते गंगा यमुना यही पर बहते सब्जी फल यहाँ ही उगते धन फसल यहाँ ही उपजे धरती माँ की देख रेख कर हमको फर्ज़ निभाना है
– अनुष्का सूरी
Mati se hi janam hua hai Mati mein hi mil jana hai Dharti se hi jeevan apna Dharti par hi saje sab sapna Sab jeev jantu dhara par rahte Ganga Yamuna yahi par bahte Sabji Fal yahan hi ugte Dhan Fasal yahan hi upje Dharti ma ki dekh rekh kar Hamko farz nibhana hai
प्यारे प्यारे फूल रंग बिरंगे प्यारे फूल कितने कोमल कितने नाज़ुक खींचे सबको अपनी और खुशबू दूर दूर तक फैलाते सबको अपने पास बुलाते तुम भी बन कर फूल जैसे सजा दो धरती को बग़ीचे जैसे
-अनु बाला
Pyare pyare phool Rang birnge pyare phool Kitne komal kitne najuk Khinche sabko apni auor Khushbu dur dur tak falate Sbko apne paas bulate Tum bhi ban kr phool jaise Sja do dhrti ko bagiche jaise
जल ही है जीवन
जल ही है कारण
जल में ही पृथ्वी समाई
जल में ही जीवन की सच्चाई
जल के बिन मीन का ना जीवन
जल के बिन प्यासा जल उपवन
जल से ही होती है खेती खलियारी
जल से ही ही बनी है देह हमारी
जल ही है जो बरसता बन सावन
जल ही है जो देता है बंजर को जीवन
जल ही है पावन
जल ही है मंगल
जल ही है जन धन
जल ही है जन धन
रात का जब है घनघोर साया
तब आकाश में चाँद जगमगाया
टिमटिमाते तारों के आँगन में
गोल चकोर मन को भाया
चाँद की शीतल चांदनी ने
दबी आकाँक्षाओं को जगाया
चाँद कहता है सबसे रोज़
इंसान तू हार से क्यों घबराया
देख मुझे मेरे दाग देख
मुझपर बहुतों ने आरोप लगाया
मैं निडर सफ़ेद चादर ओढ़
आज फिर दोबारा यहीं आया
-अनुष्का सूरी
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