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एक लंबा सफर है रोज़ चलते रहना होगा बिना थके, रुके
इस ज़िंदगी को जीना होगा मुश्किलों का सामना तो होता रहेगा
यदि सलामती चाहते हो तो लड़ना पड़ेगा ये एक जंग है
बंधू, ज़ख्म तो होंगे ही उन्हें नज़र अंदाज़ कर के आगे बढ़ना होगा
ज़िंदगी एक जंगल है परेशानी तो होगी सही राह पर चलते रहो
जीत तुम्हारी ही होगी ऐसे न रो बंधू, तुम्हे यह सहना होगा
परेशानी को नज़र अंदाज़ करके तुम्हे आगे बढ़ना होगा
दुःख भी मिलता है, खुशियां भी मिलती है
यह दोनों साये की तरह ज़िंदगी भर साथ चलती है
एक दिन रात ढलेगी, उजाले का बसेरा होगा बंधू आज उदास हो !
कल चेहरा खुशियों से भरा होगा गलतियां तो होंगी तुम्हे ही सुधारनी होगी
ज़िंदगी बहुत छोटी है तुम्हे बड़ी बनानी होगी
यह अभी बेरंग है, बेढंग है ज़िंदगी तुम्हे ही सवारनी होगी
काम बहुत बड़े बड़े है, मेहनत करनी होगी फिर क्या बंधू !
मंज़िल तुम्हारे सामने होगी किसी से नाराज़ न होना,
न गुस्सा करना बस परिश्रम के बल से मंज़िल की ओर बढ़ते रहना

-मोहम्मद उजैब

ek lamba safar hai roz chalte rhna hoga bina thake ruke
es zindgai ko jeena hoga mushkilo ka samna to hota rhega
yadi slamati chahte ho to ladana padega ye ek jang hai
bandu jkham to honge hi unhe nazar andaz kar ke aage badna hoga
zindagi ek jangal hai presani to hogi sahi raah par chalte raho
jeet tumhari hi hogi ese na ro bandu tumhe yeh sahana hoga
presani ko nazar andaz kar ke tumhe aage badna hoga
dukh bhi milta hai khushiyaan bhi milti hai
yeh dono saye ki tarh zindagi bhar sath chahlti hai
ek din raat dhlegi,ujale ka besera hoga bandu aaj udas ho
kal chehra khushoyon se bhra hoga galtiyan to hongi tumhe hi sudharni hogi
zindagi bhot choti hai tumhe hi bnani hogi
yeh abhi berang hai ,bedhang hai zindagi tumhe hi swarni hogi
kam bhut bade bade hai mehanat karni hogi fir kya bandu
manjil tumhare samne hogi kisi se naraz na hona
na gussa karna bas parisharm ke bal se manjil ki aur badte rehna

-Mohd Uzaib

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