Hindi Poem on Greatness of Mother-Ma Ki Mamta

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माँ की ममता

माँ तो माँ होती हैं,

माँ की ममता बड़ी निराली होती है,

सुख-दुःख में जो खुद को टूटने नहीं देती,

आखिर वही तो माँ होती है।

मत कर अभिमान चूर-चूर हो जाएगा,

माँ का अपमान मत कर

तू दुष्ट संतान कहलायेगा।

जिस माँ ने तुम्हें जीवन दिया

उस माँ को क्यों तुम भूलना चाहते हो,

तुम इतने क्यों लाचार बनना चाहते हो।

बार-बार माँ तुमसे यही कहती है कि अपना ले

माँ को वर्धाश्रम मत भेज।

तुम्हारे घर के सामने मुझे

छोटी सी कुटिया मुझे रहने के लिए दे दे ,

मैं उसमें रह लूँगी।

तुम सुख दो या दुःख दो

मुझे कोई फ़र्क नही पड़ता,

बस तुम दिन में एक बार दिख जाओ

इसी बात की मुझे खुशी हो।

फिर माँ वही कहती है अपना ले

माँ को वर्धाश्रम मत भेज।

जय हिंद

जय भारत

जय माँ

जय गौ माता जी

महामाया मोड़ी माताजी।

-कवि रवि पाटीदार

Hindi Poem on Importance of Time-Waqt

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वक़्त
ना जाने वो पल हाथ से कैसे छूट गया
ना जाने कब कैसे कोई अपना रूठ गया
अनजान थी मैं हर एक वो चीज़ से
ना कोई अंदाज़ा रहा और
मेरा ख्वाब यू ही टूट गया
पर अब मुझे समझ आ गया
ख्वाब दूसरा आ जाएगा
वक़्त लेकिन चला जाएगा
वक़्त ऐसी चीज़ है जो
हँसाएगा ओर रुलायेगा |
– नेहा सॉ

Hindi Poem on Courage-Sahas

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साहस
जीने को मिल जाये सहारा,
जीवन में कोई कभी न हारा।
बन जाता है, संवर जाता है,
प्यारा न्यारा वक्त हमारा।।
हाथ बढ़े तो बढ़ गये साथ किसी के।
जानो ज़रा,समझो जग मे जज़्बात किसी के।।
बढ़ते जाएँ हम आगे,
आगे से मुश्किल अपने भागे।
जान गए,पहचान गये
दिल में अपने अरमान जागे।।
-संजय

Hindi Poem on Life-Ye Zindagi

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ये ज़िन्दगी
जीने की चाह सभी को होती है सदा।
ये ज़िन्दगी नये सपने संजोती है सदा।।
अपने अरमानों को हम सजाएँ।
इन्हें और भी खूबसूरत बनाएँ।।
बन जाये बेहतर आज, कल अपना।
सदा शांति से गुज़रे हर पल अपना।।
अपनी गलती को हम सुधारें।
अच्छी दृष्टि से सबको निहारें।।
-संजय

Ye Zindagi

Jeene ki chah zabhi ko hoti hai sada

Ye zindagi naye sapne sanjoti hai sada

Apne armaano ko ham sajayein

Inhein aur bhi khoobsurat banayein

Ban jaye behatar aj, kal apna

Sada shanti se guzre har pal apna

Apni galati ko ham sudharein

Acchi drishti se sabko niharein

-Sanjay (Poet)

Hindi Poem on Life-Zindagi

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ज़िन्दगी सांसों की गुलाम क्यों है?
हुकूमतें सहती, सुबह शाम क्यों है?
हर लम्हा बताता है, हम हैं तो तुम हो
कैसे गुमान करें, ज़िन्दगी हैरान क्यों है?

अटकती है, चलती है, रुकती है कभी
भारी ज़िन्दगी पे खुले आम क्यों है?

-अविनाश

Zindagi sanson ki gulaam kyo hai?

Hukumatein sehti, subah-sham kyo hai?

Har lamha batata hai, ham hain to tum ho

Kaise gumaan karein, zindagi hairan kyo hai?

Atakti hai, chalti hai, rukti hai kabhi

Bhaari zindagi pe khule aam kyo hai?

-Avinash (Poet)