People will criticize you anyway-Hindi Poem|कुछ तो लोग कहेंगे

कुछ तो लोग कहेंगे

लोग कहेंगे के आप गलत हो,

लोग कहेंगे के आप गंदे हो ||

पर जो दुसरों को बुरा कहे,

उसे फरिश्ता भी कैसे कहे ||

जब जब कामयाबी मिलते जाएँगी,

तब तब परेशानियां बढ़ती ही जाएँगी ||

लोगों का क्या दिल पे लेना,

उनकी तो फितरत ही ऐसी हे,

वोह तो उनके हिसाबसे बदलते ही जाएँगी ||

-ज्ञानेश्वरी घुटे

Kuch To Log Kahenge

Log kahenge ke aap galat hoo,

Log kahenge ke aap gande hoo.

Par jo dusronko bura kahe,

Usse farishta bhi kaise kahe.

Jab jab kaamyabi milte jaayegi,

Tab tab pareshaniya badhti hi jaayegi.

Logon ka kya dil pe lena,

Unki toh fitrat hi aisi he,

Woh toh unke hisabse badalte hi jaayegi.

-Gyaneshwari Ghute

Hindi Poem on Memories – Yad

होंठों पर कोई फ़रियाद ना आए,

चलो सोने दे यादों को,

अब कोई याद आए।

ना देखे अब ख़्वाबों की किरचो में अपनी परछाईं,

गुजर जाए यह चुभन वाली तन्हाई,

हरकत यादों की अजीब सी कैफ़ियत है साँस की तरह ,

चलती है साथ बस इतना हो कि न उमड़े बादल ,

बरसात ना आए ज़रा थमे जाए बारिशें सैलाब ना आए।

-लता प्रसाद

Yaad

Hothon parlar koi phriyad na aaye,

Chalo sone dein yaadon ko

Ab koi yaad na aaye!

Na dekhen ab khvaab ki kirchon mein apni parchai

Gujar jaaye yah chubhan vali tanhaai,

Harkaten yaadon ki

Ajeeb si kai phi yat hai

Sans ki tarah chalti hain saath,

Bas itna ho na umadein badal ,

Barsaat na aaye,

Jara tham jayen barishen,

Sailab na aaye!

-Lata Prasad

Lovers in Isolation – आइसोलेशन में प्रेमिकाएं

आईसोलेशन में.. प्रेमिकाएं…..

(1) पेड़,नदी,पहाङ और झरने प्रेमिकाएं उन सब से लेती है उधार

एक-एक कटोरी प्रीत और करघे की खङ-खच में बहाती हुई

अपनी निर्झरिणी वे बुन डालती है एक खूबसूरत कालीन

जिसमें मौजूद गाँव खिलखिलाता है

उसकी हँसी के साथ अपने दुरभाग की पजल को सही

खानों में फिट कर वे सुभाग का हल तलाश लेती है

आयु की सटीक गणना से ज्यादा वे

अखबार के नीरस कोने का कठिनतम सुडोकू हल कर लेती है

तुम्हारी कुटिल मुस्कुराहटों में कहीं खो सी गई है प्रेमिकाएं

तुम्हारे खुदपरस्त स्वार्थ में कहीं बिखर सी गई है प्रेमिकाएं

इससे पहले कि बुहार दी जाए वें कतरा-कतरा समेट कर फिर उठ खड़ी होती है

ये ही हैं वे प्रेमिकाएं

ऐतिहासिक ग्रंथों में नायक को अमर करने संवादहीन चरित्र जी लेती है,

शेल्फ में सुस्ताती किसी रामायण पर…

गर्द सी सिमटी हुई महाभारत पर…

एक वर्गज लाल सूती कपङे सी लिपटी हुई।

– प्रतिभा शर्मा

Hindi Poem on Hope – उम्मीद

दरों दीवार अलग – कूचा अलग
माना अलग है मकां
फिर भी नफ़्स हमारी
जुदा है कहाँ
कभी तो इनायत होगी, और
पिघलेगी तू एक रोज़
बा – दस्तूर उसी इंतज़ार में
बैठे हैं यहाँ
बे – वज़ह है ये ज़िक्र
की खता किसकी थी
गाज दोनों पे गिरी, क्या कहें
किसने कितना सहा

सहल नहीं की भूल जाएं
जो कुछ है हुआ
मुश्किल भी नहीं की, फिर सजायें
एक हँसता जहां

आर्य वशिष्ठ

Ummeed

Dar-o-deewar alag, kucha alag
Mana alag hai manka
Fir bhi nafs humari
Juda hai Kanha

Kabhi to inaayat hogi, or
Pighlegi tu ek roj
Ba-dastoor usi intezaar main
Baithe hain yahan

Be-wazah hai ye zikr
ki khata kiski thi
Gaaj dono pe giri, kya kahain
Kisane kitna Saha

Sahal nahi ki bhul jaayen
Jo kuch hai huaa
Mushkil bhi nahi ki, fir sajaaye
Ek hansta jahaan.

Arya Vashishth

Hindi Poem on Love Conflicts-Badlaav-रिश्तों में टकराव पर कविता

बदलाव

चलो मान लिया ना मैं सही

फिर भी मन में है शोर कोई

ना समझ रहा मुझ को कोई

बस थोप रहे की तू ना सही

गलती क्या है जो गलत हूं मैं

अब तक न थी अब बुरी हूं मैं

चलो मान लिया मैं सही नही

पर यूं बतलाओ क्या तुम हो सही??

मुझको क्यों लगते बदले तुम

मैं तो हूं वही फिर क्या बदलाव आके गए

मन में क्यों न झाक सके

हां रूठी हूं इस बात से मैं

हां पहली बार ही क्रुद्ध हुई क्या रूठने से मैं बुरी बनी??

तुम त्याग अहम अपना,

अपने में भी तो ढूंढो खामी

यूं रूठी मुझको बोल गए

तुम नहीं रही हो पहली सी!!

-वंशिका

Badlav

Chalo man liya na mai sahi

Fir bhi man me hai shor koi

Na samajh raha mujhko koi

Bas thop rahe ki tu na sahi

Galti kya hai jo galat hu me

Ab tak na thi ab buri hu me

Chalo man liya mai sahi nhi

Par tu batlao kya tum ho sahi??

Mujhko kyo lagte badle tum

Mai to hun vahi

Fir kya badlav aank gye

Man me kyu na jhank sake

Ha roothi hu is bat se mai

Ha pahli bar hi krush hui

Kya roothne se mai buri bani

Tum tyag ahem apna,

apne me bhi to dhundo khaami

Yu roothi mujhko bol gye

tum nhi rhi ho phli si

-Vanshika