Hindi Poem on God – मैंने देखा है खुदा को

 

हां मैंने देखा है खुदा को कूड़े के ढेर पर कचरा बिनते
मासूम बच्चो के हसीं सपनो में हां मैंने देखा है
खुदा को बड़ी सी कोठी में अकेली लेटी
बेबस माँ की चेहरे की झुर्रियों में हां मैंने देखा है
खुदा को मौत की छाती पर जंग लड़ते
सिपाही के हौसलों में हां मैंने देखा है
खुदा को निस्वार्थ परोपकार में जिंदगी लुटाते
अनगिनत सज्जनो के भावो में हां मैंने देखा है
खुदा को थके हुए मुसाफिर के अडिग चाल में
हां मैंने देखा है खुदा को मुश्किलों से लड़ते
हर उस शख्स में जिसने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी
जिसने कभी हार नहीं मानी जिसने त्याग से,
बलिदान से जिंदगी को नए मायने दिए
समाज को ,धर्म को ,राष्ट्र को अपनी खुशबु से
महकाया अपनी रौशनी से उज्जवल किया हां
मैंने देखा है खुदा को ……..

– जितेंद्र जैन 

Haan mene dekha hai khuda ko kude ke dheir pe kachara binte
Masoom bachon ke hasin sapno mein hanmene dekha hai
Khuda ko badi si kothi me akeli leti
Bebas maa ki chehre ki jhuriyaan mein haan menee dekha hai
Khuda ko maout ki chati par jung ladte
Sipahi ke hoslon mein haan mene dekha hai
Khuda ko niswarth propkaar mein zindgi lutate
Anginat sajanno ke bhavo mein haan mene dekha hai
Khuda ko thake hue musafir ke aadig chal mein
Haan mene dekha hai khuda ko mushliyon se ladte
Har us shkas mein jisne kabhi umid nahi chodi
Jisne kabhi haar nahi mani jisne tyaag se
Balidaan se zindagi ko naye mayne diye
Samaj ko dharam ko rashtra ko apni khushbu se
Mhkaya apni roshni se ujwal kiya hai haan
Mene dekha hai khuda ko…

-Jitendra Jain

Hindi Poem on Good Habits – अच्छा है जी अच्छा है

सुबह सवेरे जल्दी उठना, अपने बड़ो को नमन करना,
अच्छा है जी अच्छा है।
नित्य कर्म में ना अलसाना, कुल्ला- मंजन ढंग से करना,
अच्छा है जी अच्छा है।
खूब चबा कर भोजन करना, दिन भर खूब पानी पीना ,
अच्छा है जी अच्छा है।
समय पर पढ़ना, समय पर लिखना, खेल- कूद भी, समय पर करना,
अच्छा है जी अच्छा है।
स्वस्थ रहेगा, जब तुम्हारा बचपन, खुशहाल होगा, तब ही सारा जीवन।
अच्छा है जी अच्छा है। 

-सुनीता बहल

Acha hai ji acha hai
Shubh savere jaldi uthana apne bado ko naman krna
Acha hai ji acha hai
Nitya karm mein na alsana, kulla manjan dhang se karna
Acha hai ji acha hai
Khub chaba ke bhojan karna din bhar kub pani pina
Acha hai ji acha hai
Samay par padhna samay par likhna khel kud bhi samay par karna
Acha hai ji acha hai
Swasth rahega jab tumhara bachpan khushaal hoga tab hi sara jeevan
Acha hai ji acha hai 

-Sunita bahal

Hindi Poem on Farmer – एक किसान

दो दिनों से कुछ खाए बिना , वो भूखा सोया था ।।
फसलो को अपनी देख कर , वो खूब रोया था ।।१

बरसात गुजर तो गई , पर कुए भी भर न पाई ।।
कर्ज की पहली ही किस्त थी ,
जो दो सालो बढ़ती आई ।।२

घर था गिरवी रखा उसने , पर ब्याज इतना बढ़ गया था ।।
छोड़ कर चल दिए थे अपने , वो अकेला पड़ गया था ।।३

घर नीलाम होने की डर से , वो बहुत डर गया था ।।
जिन्दा रहने की चाह थी उसकि,पर वो टूट कर बिखर गया था ।।४

रहमत की भीख मांगी थी उसने,
पर वक्त बहुत हो चला था ।।
दो दीन बीद घर नीलाम होना था, वो एक दीन पहले छोड़ गया था ।।५

पत्नी माइके से लोटी नहीं थी , बेटे को साथ लिए थी वो ।।
मुश्किल वक्त में साथ न देकर , पति को छोड़े हुए थी वो ।।६

वो अकेला गम का बोझ लिए था ,
पर अब तो कंधे भी टूट गए थे ।।
रब रूठा था जायज था , पर तब तो अपने रूठ गए थे ।।७

खाकर जहर भी जब न मोत आई , वो फासीं लगाकर लटक गया ।।
दूसरे दीन अख़बार ने छपा ,
एक और किसान सटक गया ।।८

पर तब इंसानियत शर्मसार हो जाती हे, जब हुकूमत ये कहती हे ।।
पारिवारिक कलह के चलते , ऐसी घटनाए होती रहती हे ।।९

पर कर्ज माफ़ फिर भी न होता ,
घर फिर भी नीलाम होता हे ।।
ये किसानो का नसीब भी इतना ,
कयूँ बेहरहम होता हे ।।१०

~ अंशुमान शर्मा ‘सिद्धप’