Category Archives: Hindi Poems

Hindi Poem on Honesty-Bhalai

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भलाई
है इस जगत में कोई सच्चाई ।
कोई कोई करे इसमें भलाई।।
सच्चे मार्ग पर चलने वाले,
दुःख पाते हैं पर वही जीत जाते हैं।
लाखों बाधा पार करे सच से ही
बस वार करे हर झूठ हराते है।।
-संजय

Hindi Poem on Makar Sankranti-Bezubaan Parinda

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मकर संक्रांति: बेज़ुबान परिन्दा

बौराया हुआ शहर अपनी कटी पतंगे ढूंढ रहा है,
खामोश मांजा सर सर हाथ से निकल रहा है,
आसमान में जलती लालटेनें, रोशन सा सकरात मन रहा है,
एक बच्चा हाथ में कटी पतंगे का ढेर लिए घर लौट रहा है,
कल लाल परसों पीली दिन भर का उत्सव नहीं,
साल भर की उम्मीदें जगा रहा है,
बेखौफ जमीं की दूरी को नगें पांव खगालते,
नजरें ऊपर आसमान की रोशनियों को ढूंढते,
सामने बेसुध पड़ा परिन्दा, मांजे के जख्म में तर बतर सांसे गिन रहा है,
एक रोशनी होले से नीचे आयी,
आह! गाड़ियों की सरसराहट खून में तब्दील, हर शख्मुस मुआयना कर रहा है,
बेसुध परिन्दा मानो चीखे जा रहा है,
कोई मसीहा इधर भी देखे,
शहर की बेपरवाही से कोई बेजान कट रहा है,
तो कोई गिरती रोशनियों से जल रहा है,
फिर कौन कहता है कि मेरा शहर संवर रहा है,
झूठी चमक से रोशन और सच से सब कुछ दहक रहा है,
तीन से फुटपाथ पर बैठा गोलू दुबका हुआ है,
रंगीन पतंग से बहक रहा है, मांजे से कट रहा है,
और पता नहीं किस बेरहम बेपरवाही से सुकून जल रहा है,
बौराया हुआ शहर अपनी कटी पतंग को ढूंढ रहा है!!!!!!!!
डाॅ. अवन्तिका

Hindi Poem on Dreams-Jeevan Ka Marg

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जीवन का मार्ग
मैं जिसमें चुन -चुन कर कदम रखती हूँ,
जीवन का वो हर मार्ग मैं खुद ही बनाती हूँ।
एक भूलभूलैया सा नज़र आता है खुद की आँखों में,
मै अपनी नज़रों में ही खो जाती हूँ।
जीवन किसी रेल सा गुजरता है,
मैं किसी पुल की भाँति कंपकंपाती हूँ।
मै जिसमें चुन-चुन कर कदम रखती हूँ,
जीवन का वो मार्ग मैं खुद ही बनाती हूँ।
मैं जब तेरे बारे में सोचती हूँ ,
फिर दुनियाँ भूल जाती हूँ।
मेरे हर गम में साथ तेरा है,
तेरे होने से खुश सवेरा है।
तु जो हँसता है मुझे हँसाने की खातिर,
मैं दर्द में भी हँस देती हूँ।
मैं जिसमें चुन-चुन कर कदम रखती हूँ,
जीवन का वो मार्ग मैं खुद ही बनाती हूँ।
तेरी आँखों में नज़र आता है स्वप्न मेरा,
जो मै हर रात सोते जगते देखती हूँ।
पर जब ओझल तू हो जाता है,
हर स्वप्न बुलबुले की तरह मिट जाता है।
मैं भी अपनी नादानी समझकर फिर गहरी नींद में सो जाती हूँ।
मैं जिसमें चुन-चुन कर कदम रखती हूँ,
जीवन का वो मार्ग मैं खुद ही बनाती हूँ।
-कविता यादव

Hindi Poem on Politics-Rajneeti Ki Vyatha

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राजनीति की व्यथा

क्यों मार डाला तुमने राजनीति को,
क्यों नहीं अपनाते हो अच्छी नीति को।
क्यों कलंकित कर डाला तुमने राजनीति को,
क्यों नही छोड़ते हो गन्दी नीति को।
क्या बिगाड़ा था तुम्हारा राजनीति ने,
क्यों विध्वंस कर दिया तुमने राजनीति को।
भ्रष्टाचारियों को देखकर पैसो का उतर गया रंग,
दगाबाजी नेताओं को देखकर यह गए सब दंग।
फरेब नेताओं को तुमने राजनीति में उतार दिया,
जिन्हे आती थी करना अच्छी राजनीति,
उन्हें घर में ही क्यों बिठा दिया।

-कवि रवि पाटीदार

Inspirational Hindi Poem-Sahyog

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सहयोग
करें हम सदा सहयोग सभी का ।
यही मकसद हो अपनी ज़िन्दगी का ।।
ये जिंदगी मिली बड़ी रहमतों से,
इसे हम सँवारे ,इसे हम सजाएँ।
करे खूब कोशिश, मेंहनत के बल पे इसे और बेहतर बनाएँ।।
मुश्किलें हरा दें, जहाँ को दिखा दें अपने दम पर हम ।
ना हारें कभी किसी बात से डटे रहे जीवन भर हम।।
-संजय