Tag Archives: ज़िन्दगी पर कविता

Hindi Poem on Storytellers-Kahani


कहानी
चलो आज एक कहानी और लिखी जाये
जिस पर दो-तीन बातें खुल कर बोली जायें
चाहे किसी को पसंद आये चाहे न आये
मेरा तो काम है कि हम बस यूं ही लिखते जायें
कई लोग हमें हर बार बस सौ-सौ ताने सुनायें
मगर ये कलम भी किसी से कुछ कम नहीं
ये हमारा हर परिस्थिति में खूब साथ निभाए
ये कलम कहीं अकेली न रह जाये इसलिए,
दिल और दिमाग ने भी खूब पेंच लड़ाए
ये सोच भी कहीं हमारी पीछे न रह जाये
इसलिए हम अब इसे बाहर की और ले आये
छोटे- छोटे से शब्द में हम यूं डूबते जायें
अब इस कहानी के समंदर में लहरें भी मौज उड़ाएँ
कहानियों में हम इस तरह घूमते जायें
ये वक्त कब गुज़रे पता भी न चल पाये
कब दिन चढ़ जाये और रात ढल जाये
मेरे दिल को बस ये यूं ही भाते जाए
इन कागज़ों पर अनोखा संसार नज़र आये
कलम की नाव में सवार होकर मन हिचकोले खाये
और ये सोच भी मांझी का किरदार निभाए
ज़िन्दगी के नए-पुराने किस्से उभरते हुए आये
जो हमें हमारे ही किरदार की कहानी दिखाएं
इन पलों को हम एक बार फिर से जीते जायें
मेरा मन बस यही एक बोल कहता जाये
चलो एक कहानी और फिर से लिखी जाये
-अंजलि सुवासिया (रचनाकार )

Hindi Poem on Life-Ye Zindagi


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ये ज़िन्दगी
जीने की चाह सभी को होती है सदा।
ये ज़िन्दगी नये सपने संजोती है सदा।।
अपने अरमानों को हम सजाएँ।
इन्हें और भी खूबसूरत बनाएँ।।
बन जाये बेहतर आज, कल अपना।
सदा शांति से गुज़रे हर पल अपना।।
अपनी गलती को हम सुधारें।
अच्छी दृष्टि से सबको निहारें।।
-संजय

Ye Zindagi

Jeene ki chah zabhi ko hoti hai sada

Ye zindagi naye sapne sanjoti hai sada

Apne armaano ko ham sajayein

Inhein aur bhi khoobsurat banayein

Ban jaye behatar aj, kal apna

Sada shanti se guzre har pal apna

Apni galati ko ham sudharein

Acchi drishti se sabko niharein

-Sanjay (Poet)

Hindi Poem on Life-Zindagi


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ज़िन्दगी सांसों की गुलाम क्यों है?
हुकूमतें सहती, सुबह शाम क्यों है?
हर लम्हा बताता है, हम हैं तो तुम हो
कैसे गुमान करें, ज़िन्दगी हैरान क्यों है?

अटकती है, चलती है, रुकती है कभी
भारी ज़िन्दगी पे खुले आम क्यों है?

-अविनाश

Zindagi sanson ki gulaam kyo hai?

Hukumatein sehti, subah-sham kyo hai?

Har lamha batata hai, ham hain to tum ho

Kaise gumaan karein, zindagi hairan kyo hai?

Atakti hai, chalti hai, rukti hai kabhi

Bhaari zindagi pe khule aam kyo hai?

-Avinash (Poet)

Hindi Poems on Emotions-अनजान


पक्के मकान और कच्ची ईंटे ,
सच्चे मोती और झूठे  बोल ,
ख्वाहिशों के धागे को दिखावे की सुई से सीकर चल रहे है।
घर शमशान की राख पर नहीं बनना चाहिए ,
मगर उसी मिट्ठी के बन रहे है।
बड़े आँगन की चाह में झोपड़ी उखाड़ी ,
धूप से परदों की ओंठ में छिप रहे है।
चला जा रहा है कारवाँ रामायण का पाठ करवा कर ,
मगर खुद अपने रावण के दहन से बच रहे है।

-प्रभ पूरी

Pakke Makan Or Kacchi Inte ,
Sacche Moti Or Juthe Bol ,
Khawahiso Ke Dhage Ko Dikhave Ki Sui Se Sikar Chal Rhe Hai …
Ghar Samsaan Ki Raakh Par Nhi Banna Chahiye ,
Magar Usi Mitthi Ke Ban Rhe Hai .
Bade Aagan Ki Chah me Jopadi Ukhaadi ,
Dhoop Se Pardo ki Onth me Chip Rhe Hai .
Chala Ja Rha Hai Karwa Ramayan Ka Paath Karwa Kar ,
Magar Khud Apne Ravan Ke Dehan Se Bach Rhe Hai ..

-Prabh Purii

Hindi Poems on Childhood Memories- कभी मिलना उन गलियों में


कभी मिलना उन गलियों में
जहाँ छुप्पन-छुपाई में हमनें रात जगाई थी
जहाँ गुड्डे-गुड़ियों की शादी में
दोस्तों की बारात बुलाई थी
जहाँ स्कूल खत्म होते ही अपनी हँसी-ठिठोली की
अनगिनत महफिलें सजाई थी
जहाँ पिकनिक मनाने के लिए
अपने ही घर से न जाने कितनी ही चीज़ें चुराई थी
जहाँ हर खुशी हर ग़म में दोस्तों से
गले मिलने के लिए धर्म और जात की दीवारें गिराई थी
कई दफे यूँ ही उदास हुए तो दोस्तों ने
वक़्त बे वक़्त जुगनू पकड़ के जश्न मनाई थी
जब गया कोई दोस्त वो गली छोड़ के तो
याद में आँखों को महीनों रुलाई थी गली अब भी वही है
पर वो वक़्त नहीं, वो दोस्त नहीं हरे घास थे
जहाँ वहाँ बस काई उग आई है।

-सलिल सरोज

Kabhi milna un galiyon me kha
Chupan-chupai me hamne raat jgai thi
Jhan gude-guddiyon ki shadi mein
Doston ki barat bulai thi
Jhan school khtam hote hi apni hasi thitholi ki
Anginat mehfeele sjai thi
Jhan piknik mnanane ke liye
Apne hi ghar se na jane kitni hi chie churai thi
Jhan har khushi har gum mein doston se
Gale milne ke liye dharm aur jaat ki diware girai thi
Kai dafe yoon hi udas huye to doston ne
Waqt ve waqt jugnu pakad ke jashan mnai thi
Jab gya ki dost wo gali chod ke to
yaad mein aankhon ko mhino rulai thi gali ab abhi wahi hai
Par wo waqt nahi wo dost nahi hare ghas the
Jjhan whan bas koi uag aai hai

-Salil saroj