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क्या बात करूँ मैं लोगो की
सब आप बताये बैठे है
कुछ दर्द छुपाये बैठे है
कुछ ख़्वाब छुपाये बैठे है

कुछ हस्ते है ऊपर ऊपर
कुछ रोते है नकली नकली
कुछ बातें ऐसे करते है
संसार चलाये बैठे है

सच झूठ किसी की बातों का
कुछ पता नहीं चलता अब तो
कुछ के सच भी अब झूठ लगे
कुछ झूठ चलाये बैठे है

ख्वाबों का पर्दा यहाँ पर अब
बंद सा है खुलता ही नहीं
संसार समाज सभी अपने
अधिकार बताये बैठे है

इस दुनिया में अगर कुछ करना है
अपनी मर्ज़ी की करना तू
हो सफल अगर तो बात ही क्या
पर न हो तो मत डरना तू

बस चलता जा तू सही डगर
और पीछे कभी न मुड़ना तू
जब पहुंचेगा तू मज़िल पर
वो बात अलग ही सी होगी

तुझसे मिलने को सब “वोह ” लोग
कतार लगाये बैठे है

-मुसाफ़िर

Kya baat karu mein logo ki,
Sab aap bataye baithe hai.
Kuch dard chupaye baithe hai,
Kuch khawab chupaye baithe hai.

Kuch haste hai upar upar,
Kuch rote hai nakli nakli.
Kuch baatein aesi karte hai,
Sansar chalye baithe hai.

Sach jhooth kisi ki baaton ka,
Kuch pata nhi chalta ab toh.
Kuch ke sach bhi ab jhooth lage,
Kuch jhooth chalye baithe hai.

Khwabon ka parda yaha par ab,
Band sa hai khulta hi nahi.
Sansar samaj sabhi apne,
Adhikar bataye baithe hai.

Is duniya me agar kuch karna hai,
Apni marzi ki karna tu.
Ho safal agar to baat hi kya,
Par na ho to mat darna tu.

Bas chalta ja tu sahi dagar,
Or peeche kabhi na mudna tu.
Jab pahuchega tu manzil par,
Vo baat alag hi si hogi,

Tujhse milne ko sab “voh” log,
Kataar lagaye baithe hai..

-Musafir

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