शून्यता ऐसी विशालता का भी क्या जो अपने में समाने की इज्ज़त भी न दे; भले ही लदे रहो, श्वेत रत्नों से, पर ऐसे हुस्न का भी क्या, जो टिकने भी न दे, चन्द मुसाफ़िरों को; ऐसी ख्याति का भी क्या, जो पाल न सके,चार परिंदों को; यूँ तो देखे हैं हमने बहुत ख़लीफ़ा, पर ऐसी खलिफ़्त का भी क्या, जो दे ना सकें मरहम एतबार का; ऐसी खलिफ़्त से तो हम, बेनाम ही सही, कम से कम हमारे जहन्नुम में , चार परिंदे तो उड़ते है, भर भर के पलेंगे, गगन तो छूते हैं; हमें गुरूर है अपने गुमनाम-ए-शहर का, जो कम से कम पाले तो है सबको, तुम बने रहो जन्नत, हम गुमनाम ही सही, हमें अपनी इस ताशीर पर ही नाज़ है; और जो ढूंढते हैं,जन्नत लपलपा कर हर दिन, हम उन्हें भी अपना सरायदार मानते हैं, तुम दे देना, एक बार दीदार उन्हें, कसम खाकर कहता हूँ, वो लौटकर आएंगे, हमारे सरायदार बनकर; तुमने ओढ़ी है चादर श्वेत मोतियों की, हमने ओढ़ा है मैला आँचल ही सही, पर याद रखना, फटती है चादर तुम्हारी, जबभी कभी, उसे सहते हैं, हमारे सरायदार ही सभी -शशांक मानव
ये जो गलियां कल तक झूम रहीं थी, आज ना जाने क्यों चुप हैं। सड़के बस तन्हा सी चली जा रही जाने इनको कौन सा दुख है । ये कैसा सन्नाटा छाया है ? ये कैसा समय अब आया है? कौन बतायेगा हमें, कहीं से कुछ लोग मिले जो कुछ-कुछ कहने लगे किसी ने कहा “सुना नहीं क्या हुआ इस मुहल्ले में?” “अरे! उन बच्चों की चीखें कैसे नहीं सुनी तुमने” “हाहाकार की आवाज़ें तो गूंज उठी थी” पर मैंने तो कुछ सुना नहीं “बेचारे अनाथ बच्चे थे” “बहुत मारा उन्हें उन्होंने “ “कौन से बच्चे, किसने मारा, क्यों मारा ?” मेरे सवाल से वो सहम गए और कहा “तुमने नहीं सुना तो हमें भी नहीं पता “ विनती और कई वादों के बाद पता चला जो सच,उसने तो दिल छलनी कर दिया धर्म की राजनीति ने मासूमों को पीटा और साथ दिया कानून के रखवालों ने पर उन बच्चों ने किया क्या था “कुछ नहीं बस मुल्लों के घर पैदा हुए थे” तो किसी ने उन्हें बचाया क्यों नहीं कौन बचाता? बचाने वाले तो मार रहे थे उन मासूमों को ठीक ही मिली सज़ा उनका गुनाह था ही इतना बड़ा होगा बड़ा बने का दहशतगर्द मर जाये तो कम होगा सर दर्द कहाँ से लाएंगे वो सबूत भारतीय होने का? पर किसी ने नहीं माँगा सबूत उनके देश भक्ति का सोचा मैंने वो साबित करना कठिन है बड़ा एक अनाथ कहा से लाएगा बाप दादा “मर गए सब या है बचा कोई?” “नहीं नहीं मरा कोई नहीं चोटिल हैं पर बच गए सभी” “जीवित है क्या यही है काफी? “ “नहीं तो क्या दीजियेगा गुनाहगारों को फांसी” कह कर ये वो हंसने लगे, ना किसी ने कुछ किया, ना कर सकता है। मैंने भी सबकी तरह हाथ बांधे और बढ़ गया। रास्ते में आए पत्थरों से बचकर निकल पढ़ा।।
-सामरा मैमून उस्मानी
English meaning for international readers:
The poet expresses plight over the condition of young students who were beaten severely during protests against Citizenship Amendment Bill (CAB) 2019 solely based on their religion (Muslims). The poetry is based on the current state of affairs in India with a large section of youth opposing the CAB.
कहानी चलो आज एक कहानी और लिखी जाये जिस पर दो-तीन बातें खुल कर बोली जायें चाहे किसी को पसंद आये चाहे न आये मेरा तो काम है कि हम बस यूं ही लिखते जायें कई लोग हमें हर बार बस सौ-सौ ताने सुनायें मगर ये कलम भी किसी से कुछ कम नहीं ये हमारा हर परिस्थिति में खूब साथ निभाए ये कलम कहीं अकेली न रह जाये इसलिए, दिल और दिमाग ने भी खूब पेंच लड़ाए ये सोच भी कहीं हमारी पीछे न रह जाये इसलिए हम अब इसे बाहर की और ले आये छोटे- छोटे से शब्द में हम यूं डूबते जायें अब इस कहानी के समंदर में लहरें भी मौज उड़ाएँ कहानियों में हम इस तरह घूमते जायें ये वक्त कब गुज़रे पता भी न चल पाये कब दिन चढ़ जाये और रात ढल जाये मेरे दिल को बस ये यूं ही भाते जाए इन कागज़ों पर अनोखा संसार नज़र आये कलम की नाव में सवार होकर मन हिचकोले खाये और ये सोच भी मांझी का किरदार निभाए ज़िन्दगी के नए-पुराने किस्से उभरते हुए आये जो हमें हमारे ही किरदार की कहानी दिखाएं इन पलों को हम एक बार फिर से जीते जायें मेरा मन बस यही एक बोल कहता जाये चलो एक कहानी और फिर से लिखी जाये -अंजलि सुवासिया (रचनाकार )
मन ने ठान ली है तुमसे मरते दम तक दोस्ती निभाने की बस साथ कभी छोड़ मत देना।
मुझे प्यार जताना नहीं आता तो मेरे गाली को ही मेरा प्यार समझ लेना।
-मानसी (रचनाकार)
Dosti
Sab log sath chod de to, Tum mere hath tham lena.
Agar mai khush hu toh, Mere khushi me shamil ho lena.
Agar mai udas hu toh, Chutkule suna kar hasa dena.
Agar mai galat hu toh, dat dena.
Man ne than li hai tumse marte dum tak sath nibhane ki,
Bas sath kabhi chod mat dena.
Mujhe pyar jatana nahi ata,
toh mere gaali ko hi mera pyar samajh lena.
-Mansi (Rachnakar)
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