Category Archives: Hindi Poems on Festivals

Hindi Poem on New Year Eve-Naya Varsh


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नया वर्ष
बीते वर्षों ने मिलकर
एक बैठक बुलाई
आओ नये वर्ष की दुल्हन को
देते हैं बधाई
हवा से कह दो कि
गगन सारा महकाए
फूलों से कह दो कि
वर्षा बन कर आए
इन भंवरो से कह दो कि
कोई गीत सुरीला गाए
सूरज की लाली से
इस की माँग सजाएं
इस मिट्टी से कह दो कि
कलश यह बन जाए
नये वर्ष की दुल्हन को
आओ गृह प्रवेश करवाए
-गरीना बिश्नोई

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Hindi Poem on New Year-Naya Saal


decorating-christmas-tree-2999722_960_720नया साल

गुज़रे कल को जाने दो
नववर्ष को आने दो

गिले-शिकवे मिटाएंगे
गीत नये अब गाएंगे

एक -दूसरे से जानेंगे हम सब का हाल
देखो-देखो आया नया साल, आया नया साल

अच्छी बातों से सबक लें हम
सत्य के आंचल में दुबक लें हम

सत्य मार्ग पर गमन करें
झूठ से दूर रहेंगे

दुबक-दुबक कर जाना कि कितना खट्टा-मीठा था पुराने वर्ष का जाल
देखो-देखो आया नया साल,आया नया साल

मनमुटाव को दूर करें हम
जानें दिल की बात

भेद-भाव ना रखना कोई
जागेगी अब किस्मत सोई

होना है अब तो किस्मत से मालामाल
देखो -देखो आया नया साल, आया नया साल

द्रिग को ना करो प्लावन
नववर्ष भी काल प्रवाहिनी बन जाएगा

विनाशकारी ना हो न्यू ईयर
न बनने पाए केस कोई रियल

धन दौलत ना होने दो पर ना होना हंसी से भी कंगाल
देखो-देखो आया नया साल, आया नया साल

मन के अँधेरे चमन में
विवेक रूपी पुष्प हो

विघ्न बाधाओं का अभिनंदन करें हम
त्यागमय, दयावान और गौरव उज्जवल रहें हम

तारे बनकर उभरें हम, ताकी भविष्य बनें कमाल
देखो-देखो आया नया साल, आया नया साल

आहान करो कुछ कर्तव्यों का
तन,मन, धन से प्रण करो

सृष्टि के नवयुवक हम
सभ्यता,संस्कृति और प्रकृति से हम

सबके हित में हो हम नवयुवकों की चाल
देखो-देखो आया नया साल, आया नया साल

– रीत (रितिका) दाँगी

Hindi Poem on Greatness of Mother-Aisi Kyo Hai Tu Maa


people-3065370_960_720आखिर ऐसी क्यों है तू माँ..

घर से बाहर जाते वक़्त
तेरी आँखों से न ओझल हो जाऊँ मैं
उस हलक तक मुझे निहारती रहती है तू
आखिर ऐसी क्यों है तू माँ…।

तेरे टूट जाने में ही मेरा बनना तय था
फिर भी बेशर्म-सा उग रहा था मैं
और ख़ुशी-ख़ुशी ढ़ल रही थी तू
आखिर ऐसी क्यों है तू माँ…।

याद है वो दिन मुझे जब घर में
खाने वाले पांच और रोटी के टुकड़े थे चार
तब ‘मुझे भूख नहीं है’ ऐसा कहने वाली थी तू
आखिर ऐसी क्यों है तू माँ…।

आज सबकुछ बदला-बदला नज़र आता है
फिर भी इस कैल्कुलेटरमूलक दुनिया में
न बदलने वाली सिर्फ एक ही शख़्स है तू
आखिर ऐसी क्यों है तू माँ…।

कुदरत के उस सरल करिश्में को सलाम
जिसका अक्स मैं खुद में पाता हूँ
अपना सबकुछ त्याग कर भी मुझे अपनी
प्रतिकृति होने का आभास कराती है तू
आखिर ऐसी क्यों है तू माँ…।

हमेशा शिकवा रहेगा मुझे तुझसे यह कि
क्यों तू हमेशा लुटाती रही और मैं रहा लूटता
फिर भी शिकन तक नहीं तेरे माथे पर किंचित
आखिर ऐसी क्यों है तू माँ…।

  • © मीना रोहित (आयकर अधिकारी , दिल्ली)

Hindi Poem on Woman – नारी


तू ही धरा, तू सर्वथा।
तू बेटी है ,तू ही आस्था।
तू नारी है , मन की व्यथा।
तू परंपरा ,तू ही प्रथा।

तुझसे ही तेरे तपस से ही रहता सदा यहां अमन।
तेरे ही प्रेमाश्रुओं की शक्ति करती वसु को चमन।
तेरे सत्व की कथाओं को ,करते यहाँ सब नमन।
फिर क्यों यहाँ ,रहने देती है सदा मैला तेरा दामन।

तू माँ है,तू देवी, तू ही जगत अवतारी है।
मगर फिर भी क्यों तू वसुधा की दुखियारी है।
तेरे अमृत की बूंद से आते यहां जीवन वरदान हैं।
तेरे अश्रु की बूंद से ही यहाँ सागर में उफान हैं।

तू सीमा है चैतन्य की ,जीवन की सहनशक्ति है।
ना लगे तो राजगद्दी है और लग जाए तो भक्ति है।
तू वंदना,तू साधना, तू शास्त्रों का सार है।
तू चेतना,तू सभ्यता, तू वेदों का आधार है।

तू लहर है सागर की ,तू उड़ती मीठी पवन है।
तू कोष है खुशियों का ,इच्छाओं का शमन है।
तुझसे ही ये ब्रह्मांड है और तुझसे ही सृष्टि है।
तुझसे ही जीवन और तुझसे ही यहाँ वृष्टि है।

उठ खड़ी हो पूर्णशक्ति से।
फिर रोशन कर दे ये जहां।

जा प्राप्त कर ले अपने अधूरे स्वप्न को।
आ सुकाल में बदल दे इस अकाल को।
तू ही तो भंडार समस्त शक्तियों का।
प्राणी देह में भी संचार है तेरे लहू का।

-अर्चना

Tu hi dhara , tu hi sarvtha
Tu beti hai tu hi aastha
Tu nari hai man ki vytha
Tu parmpara, tu hi partha

Tujhse hi tere tapas se hi rehta sada yhan aman
Tere hi premashron ki sakti karti basu ko chaman
Tere satav ki kathaon ko yhan sab naman
Fir kyon yahan rahne deti hai sada meila tera daman

Tu maa hai tu devi,tu hi jagat awtari hai
Magar fir bhi kyon tu vasudha ki dukhiyarihai
Tere amrit ki bund se aate yhan jivan vardaan hai
Tere aashuon ki boond se hi yha sagar mein ufaan hai

Tu seema hai chaitany ki Shehnshakti hai
Na lage to rajgaddi hai aur lag jaye to bhakti hai
Tu vandana, tu sadhna, tu shastron ka saar hai
Tu chetna, tu shabhyata, tu vedon ka aadhar hai

Tu lehar hai sagar ki tu udati mithi pawan hai
Tu kosh hai khushiyon ka ichchaon ka sham hai
Tujhse hi ye brahmand hai aur tujhse hi shrishti hai
Tujhse hi jivan aur tujhse hi yhan vristhi hai

Uth khadi ho puranshkati se
Fir roshan kar de ye jhan

Ja prapt karle apne adhure swapan ko
Aa sukal me badal de es akaal ko
Tu hi to bhandar samast shaktiyoon ka
Prani deh mein bhi sanchaar hai tere lahu ka

-Archana

 

Hindi Poem on Vishwakarma – जग का प्रथम अभियंता


सागर मंथन के परिणाम से  चौदह वस्तुओं के संग एक रत्न भी बाहर आया,  प्रकाण्ड अभियंता,  शिल्प कला पारंगत  ये देव रूप विश्वकर्मा  भगवान कहलाया।  कृष्ण की भव्य नगरी द्वारिका को जिसने अति मनोरम रूप में बनाया रातोंरात,  पाडवों की भव्य मायासभा का निर्माण कर, इस विश्व का वो प्रथम अभियंता कहलाया। -सतीश वर्मा Sagar manthan ke parinaam se Chaudah vastuon ke sang Ek ratna bhi baha aya Prakaand abhiyanta Shilp kala parangat ye dev rupi Vishwakarma Bahgwaan kahalaya. Krishan ki bhavy nagari dwarika ko, Ati manorama rup mein banayaa raatonraat Pandavon ki bhavya mahasabhaa ka nirman kar Is vishw ka pratham abhiyanta kahalaya. -Satish Verma