
मंज़िल
जो बढ़ा है ,अपना कदम आगे।
वो रुके ना किसी डर से पीछे।।
हमें हिम्मत से बढ़ना होगा।
नया आयाम फिर से घड़ना होगा।
ये मुश्किल कुछ पल की हट जायेगी।
हमे यकीं है, मंज़िल ज़रूर नज़र आएगी।।
-संजय

मंज़िल
जो बढ़ा है ,अपना कदम आगे।
वो रुके ना किसी डर से पीछे।।
हमें हिम्मत से बढ़ना होगा।
नया आयाम फिर से घड़ना होगा।
ये मुश्किल कुछ पल की हट जायेगी।
हमे यकीं है, मंज़िल ज़रूर नज़र आएगी।।
-संजय

चलता चल
ग़म छूपा हँसता चल
खुद को ही छलता चल ।
कदमों में है मंजिल
बस उम्मीदें करता चल ।
राहें तो हैं मुश्किल
हिम्मत कर बढ़ता चल ।
रो मत कायर बनकर
आँसू पी लड़ता चल ।
रौशन कर दिल की लौ
अन्दर से जलता चल ।
-अजय प्रसाद
टी जी टी इंग्लिश
डीऐवी पीएस पीजीसी बिहारशरीफ़
नालंदा, बिहार-८०३२१६

मेरा जीवन
खुद की आहट से क्यों डरता है
जीते जी क्यों मरता है
कष्ट नहीं विकराल इतना
डरता है तू उससे जितना
करके हौसला बढ़ कर तो देख
ऊंचाइयों पर चढ़कर तो देख
दुनिया जितनी ज़ालिम है
जीवन उतना अमिय है
जुटा अपनी ताकत को
और दुनिया को दिखा दे
मैं भी गुड़ाकोष हूँँ
यह पाठ सभी को सिखा दें
कठिनाइयों से पूछ क्या हाल करूं मैं तेरा
जा नहीं डरता मैं तुझसे क्योंकि जीवन है यह मेरा
– रीत(रितिका) दाँगी