कविता का शीर्षक: मुकाम पायेगा
जीवन के इस खेल में, तू सौ बार हारेगा
मंज़िल और जीत में कभी एक कदम का फासला रहेगा
पर हर हार के बाद, सीधा सा एक रास्ता होगा
चल कर जिसपर तू, अपनी मंज़िल के पास होगा
डर लगेगा बहुत पर, उसे तू खुद ही हराएगा
जिस दिन तू अपने मुकाम पर पहुंचेगा,
तब ये धूप छाँव का खेल ख़त्म हो जायेगा
कवयित्री का नाम -जान्हवी गुप्ता
कविता का भावार्थ:
कवयित्री जान्हवी जीवन के संघर्षों के विषय में सकरात्मक सोच रखने की प्रेरणा दे रही हैं।
Translation of Poem:
In this poem, poetess Janhvi pens the struggles of life and how patience and perseverance is required to win despite several failures.





